ईदगाह पर बवाल के अगले ही दिन मंगलवार रात को सदर के सुल्तानपुरा में सांप्रदायिक तनाव के हालात बन गए। यहां बजरंग दल के कार्यकर्ता मंदिर में आरती के लिए पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने आपत्तिजनक नारे लगाए। इसके विरोध में दूसरे समुदाय के लोग आ गए। दोनों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। हालांकि पुलिस ने पहुंचकर हालात संभाल लिए। मौके से बजरंग दल के छह कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए हैं। एहतियातन पूरे इलाके में पुलिस तैनात की गई है।
बजरंग दल कार्यकर्ता हर मंगलवार को एक मंदिर में आरती के लिए जाते हैं। इस बार सुल्तानपुरा में ऐसे मंदिर को चुना जिसके पास दूसरे समुदाय की आबादी है। बजरंग दल नेताओं का आरोप है कि उन लोगों ने आरती का विरोध किया।
इसके बावजूद आरती शुरू की गई तो कुछ युवकों ने पथराव कर दिया। उधर मौके पर मौजूद अन्य लोगों का कहना था कि विवाद तब हुआ जब आरती केबाद आपत्तिजनक नारे लगाए गए। इस पर दूसरे समुदाय के लोग विरोध करने के लिए आ गए थे।
इसका पता चलने पर बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ता भी पहुंच गए। दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। उनमें टकराव के हालात बन गए। तभी पुलिस पहुंच गई। बजरंग दल के सुनील पाराशर ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि पथराव करने वाले लोग गिरफ्तार किए जाएं। इस पर दूसरे समुदाय के लोगों ने भी हंगामा किया। इसके जवाब में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। पुलिस ने मौके से छह प्रदर्शनकारी पकड़ गए।
एसपी सिटी सुशील घुले, सीओ सदर असीम चौधरी, सीओ छत्ता बीएस त्यागी समेत शहर के सभी सर्किल के अधिकारी और फोर्स मौके पर पहुंचे। इसके बाद वहां मौजूद दोनों पक्ष के लोग भाग गए। सीओ सदर ने बताया कि बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की थी। इसका कुछ लोगों ने विरोध किया। पुलिस के पहुंचने पर दोनों पक्ष भाग गए। अब हालात सामान्य हैं।
फोर्स की कमी का फायदा उठा रहे खुराफाती
आगरा। पहले ईदगाह, अब सुल्तानपुरा। दोनों मामलों की एक वजह शहर में पुलिस फोर्स की कमी हो जाना भी मानी जा रही है। चुनाव के दौरान फोर्स की कमी नहीं थी। तब कहीं कोई हंगामा नहीं हुआ। जैसे ही फोर्स दूसरे जिलों में चुनाव कराने के लिए गई, वैसे ही यहां खुराफातियों ने बवाल करना शुरू कर दिया। सुल्तानपुरा के मामले में भी फोर्स की कमी सामने आई। पहले दो सिपाही मौके पर पहुंचे। इसके बाद अफसर आए, मगर उनकेसाथ फोर्स नहीं थी। फोर्स की कमी के चलते खुराफाती न तो चिह्नित हो पा रहे हैं और न ही उनके खिलाफ कार्रवाई हो पा रही है।
शांति समिति का अता-पता नहीं
आगरा।
शहर में दो दिन में एक जगह बवाल तो दूसरी जगह सांप्रदायिक तनाव के हालत बने। दोनों ही मामलों में शांति समिति के पदाधिकारी नजर नहीं आए। न तो बवाल के समय लोगों को समझाने के लिए पहुंचे, न ही बाद में माहौल सामान्य करने में कोई भूमिका निभाई। कई लोग तो पुलिस की ओर से फोन किए जाने पर भी मौके पर नहीं पहुंचे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि ऐसे लोगों की सूची बनाई जा रही है। उन्हें शांति समिति से बाहर कराया जाएगा।