गैस सिलेंडर रूल में सीएनजी सिलेंडर की हर पांच साल पर जांच
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अपने लाड़लों को सीएनजी ऑटो से स्कूल भेजते समय जरा ध्यान रखिएगा कि सीएनजी किट की हाइड्रोटेस्टिंग कराई गई है या नहीं। पांच साल से पुराने ऐसे सीएनजी ऑटो, जिन्होंने सिलेंडरों की हाइड्रो टेस्टिंग नहीं कराई है, वह खतरनाक हो सकते हैं।
आरटीओ ने ऐसे खतरनाक ऑटो की पहचान कर उन्हें सीएनजी न देने के लिए ग्रीन गैस को पत्र भेजा है। ग्रीन गैस ने सीएनजी पंपों को निर्देश दिए हैं कि हाइड्रोटेस्टिंग न कराने वाले ऑटो को सीएनजी न दी जाए।
शहर में आठ हजार से ज्यादा सीएनजी ऑटो हैं। सीएनजी ऑटो को हर पांच साल में किट की जांच तथा हाइड्रोटेस्टिंग करानी होती है। आरटीओ की ओर से यह निर्देश हैं कि हर ऑटो चालक सीएनजी हाइड्रोटेस्टिंग की मियाद अपने ऑटो पर लिखवाएगा, लेकिन शहर में दो हजार से ज्यादा ऑटो ने हाइड्रोटेस्टिंग कराई ही नहीं है।
दरअसल, पानी से लगातार क्षरण पर सीएनजी के प्रेशर को पुराना सिलेंडर कितना झेल पाएगा, इसकी जांच ड्राइड्रोटेस्टिग में होती है। चीफ कंट्रोलर आफ एक्सप्लोसिव्स के निर्देशों के मुताबिक, इन ऑटो को पांच साल में एक बार यह सर्टिफिकेट लेना पड़ता है।
पूर्व में आरटीओ ने 906 सीएनजी ऑटो की लिस्ट ग्रीन गैस लिमिटेड को भेजी थी, जिसके बाद शहर के सभी छह सीएनजी पंपों को निर्देश दिए गए कि ऐसे ऑटो को सीएनजी न दी जाए। इसके बाद करीब एक हजार ऑटो के सिलेंडर की मियाद और खत्म हो गई। गैस सिलेंडर रूल 2004 और 2015 के ड्राफ्ट में भी हाइड्रोटेस्टिंग के लिए कड़े प्रावधान किए गए है, लेकिन ऑटो चालक इन्हें दरकिनार कर चलते फिरते बम बनाकर घुमा रहे हैं, जिनसे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।