चीन में डाक्टर बनने गए मलपुरा के गांव सराय सहारा के छात्र कमल कुमार (22) की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। 11 अक्टूबर को आखिरी बार परिवारीजनों से उसने फोन पर बात की थी। बुधवार रात उसका शव दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया तो परिवार में कोहराम मच गया। परिवारीजनों ने अनहोनी की आशंका जाहिर की है।
थाना मलपुरा के गांव सराय सहारा निवासी किसान रामवीर का बेटा कमल कुमार झा इंटर की पढ़ाई करने के बाद डाक्टर बनना चाहता था। पिता रामवीर ने बताया कि बेटे का एडमिशन एमबीबीएस में चीन के ताइयान, शंडोंग सिटी स्थित ताईशान मेडिकल यूनिवर्सिटी में होने पर 28 नवंबर 2014 को भेजा था। कमल की फतेहपुर सीकरी स्थित गांव जाजौली निवासी बुआ इंद्रा का लड़का राहुल भी मेडिकल स्टूडेंट है।
वह तीन साल से पढ़ाई कर रहा है। दोनों साथ ही रहते थे। 11 अक्टूबर को कमल ने बहन राशि से फोन पर बात की। इसके बाद फोन कट गया। 14 अक्टूबर को बेटे के पास फोन किया तो भांजे राहुल से बात हुई थी। उसने बताया कि कमल का स्कूटी चलाते समय एक्सीडेंट हो गया।
वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसके बाद उसकी हालत के बारे में कोई ज्यादा जानकारी नहीं लगी। इस पर बहनोई निरोत्तम से बात की, लेकिन उनसे भी कोई सही जानकारी नहीं हो सकी। बुधवार सुबह फोन पर जानकारी दी गई कि चीन में इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। इसलिए उसे दिल्ली भेज रहे हैं। रात डेढ़ बजे फ्लाइट आई। मगर, एयर चाइना से उसका शव भेजा गया। यह देखकर रामवीर सन्न रह गए।
सुबह तकरीबन छह बजे उन्हेें शव सौंपा गया। आरोप है कि शरीर पर चोट के निशान थे। मुंह पर चोट लगी थी। सुबह साढ़े दस बजे गांव पहुंचने पर शव जयपुर हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया। जानकारी पर पुलिस पहुंच गई। बाद में सांसद चौ. बाबूलाल पहुंचे। उन्होंने कार्रवाई की मांग की। मलपुरा पुलिस ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद ही शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका।
बेटे की मौत के साथ टूट गए सपने
चीन में एमबीबीएस करने गए छात्र कमल की मौत के बाद पिता के नहीं रुक रहे आंसू
आगरा। मलपुरा के छोटे से गांव सराय सहारा के कमल का एडमिशन जब चीन की मेडिकल यूनिवर्सिटी में हुआ तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बेटे की ख्वाहिश पूरी करने के लिए पिता रामवीर ने भी दिनरात एक कर दिया। जमीन बेचकर रुपयों का इंतजाम किया। बेटे को डाक्टर बनाकर देश सेवा कराना चाहते थे, लेकिन वह डाक्टर बनकर तो नहीं लौटा, उसकी लाश आई।
कमल होनहार छात्र था। उसने 10वीं और 12वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी। इंटर पास करने के बाद सीपीएमटी की तैयारी की। उसका फुफेरा भाई राहुल चीन में तीन साल से एमबीबीएस कर रहा है। उसके कहने पर ही उसने डोनेशन देकर अपना एडमिशन कराया था। रामवीर ने बताया कि चीन में एमबीबीएस की पढ़ाई कराने में पांच साल में 50 लाख का खर्च बताया था। हर साल तकरीबन दस लाख रुपये देने थे। दिल्ली में टेस्ट में पास होने के बाद कमल नवंबर 2014 में चला गया। उन्होेंने तीन बीघा जमीन बेचकर 15 लाख रुपये जुटाए थे। कमल घर में सबसे बड़ा था, जबकि छोटे बेटे सचिन, अतुल और बेटी राशि हैं। कमल से ज्यादा उम्मीद थी।
पिता ने उठाए सवाल
पिता का कहना है कि कमल के साथ अगर हादसा हुआ तो शव का पोस्टमार्टम कराया गया या नहीं, इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। दोस्तों ने भी उन्हें सही जानकारी नहीं दी? साथी छात्र एयरपोर्ट क्यों नहीं आए? इसलिए मामले की जांच की जानी चाहिए।
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दिल्ली का पियूष भेजता है चीन
रामवीर के मुताबिक, मलपुरा, फतेहपुर सीकरी, भरतपुर आदि क्षेत्र के कई युवा चीन के कई मेडिकल कालेज में पढ़ाई कर रहे हैं। दिल्ली का पियूष उन्हें एडमिशन दिलाता है। इसके लिए दिल्ली में बाकायदा प्रवेश परीक्षा में सम्मिलित कराता है। कमल के एडमिशन के बाद यूनिवर्सिटी के नाम ड्राफ्ट से धनराशि भेजी थी। पियूष अपना हिस्सा अलग से लेता है।
बहन तुम घर का ख्याल रखना...
कमल अपनी बहन राशि को सबसे ज्यादा प्यार करता था। उसी से रोजाना बात भी करता था। राशि ने बताया कि 11 अक्तूबर को कमल ने उससे फोन पर कहा था कि तुम घर का ख्याल रखना। ये घर तुम्हारा है। किसी को कोई दिक्कत मत होने देना। इसके बाद भाई के दोस्त भरतपुर, डीग निवासी मुकुंद गांधी से भी फोन पर बात की। रात तकरीबन एक बजे इंटरनेट कॉल से मिस्ड कॉल भी आई। इसके बाद बात नहीं हो सकी।
मां की मौत पर आया था आगरा
कमल की मां बबली की दो महीने पहले सीढ़ियों से गिरकर मौत हो गई थी। इस पर कमल 14 अगस्त को घर आया था। 18 सितंबर को ही लौटकर गया था। पहले मां, अब बेटे की मौत से परिवार में कोहराम मच गया है।