सीसीटीवी कैमरे लगवाना अच्छी बात है लेकिन इतना भर काफी नहीं है। जरूरत इस बात है कि कैमरे ठीक से काम करें। तभी तो कोई वारदात होने पर इनका कुछ फायदा है। लेकिन ऐसा कई बार हो चुका है कि मौका पड़ने पर कैमरे खराब मिलते हैं। दिव्य के अपहरण में भी यही बात सामने आई है। मदिया कटरा रोड पर लगे 20 कैमरों से काम सिर्फ चार ही कर रहे थे। अगर सभी कैमरे ठीक होते तो बदमाशों के चेहरे पहचान में आ सकते थे।
प्रतीक वार्ष्णेय की कोठी के गेट पर कैमरा नहीं है। पीछे की तरफ एक कैमरा लगा है। यह हिस्सा उन्होेंने किताबों का काम करने वाली फर्म को किराए पर दे रखा है। पीछे की तरफ से कोठी में कई बार चोर घुस चुके हैं। इसलिए यह कैमरा लगवाया गया।
अगर मेन गेट पर कैमरा होता तो बदमाशों के चेहरे बिल्कुल साफ होते। उनकी कोठी के ठीक सामने पिंटू के घर पर चार कैमरे लगे है। इनमें से दो में पूरा घटनाक्रम कैद है लेकिन दूरी अधिक होने के चलते बदमाशों के चेहरे स्पष्ट नहीं हो पाए। पिंटू ने कैमरा पड़ोस में स्थित शराब की दुकान पर आने वाले अराजक तत्वों से परेशान होकर लगवाया था। इसके अलावा मदिया कटरा रोड पर पुलिस ने 19 कैमरे और चेक किए। इनमें से 16 खराब मिले।
बार बार यही कहानी
--। कमला नगर में घड़ियों के शो रूम में कैमरे लगे होने के बावजूद चोरी होने पर चोर इनमें कैद नहीं हुए। क्योंकि शो रूम बंद होते समय कैमरे बंद कर दिए जाते थे।
--। संजय प्लेस में लैपटॉप शोरूम में भी यही कहानी रही थी। 100 लैपटॉप चोरी किए गए थे। यहां भी रात को कैमरे बंद कर दिए जाते थे। इसलिए चोर कैमरे में कैद नहीं हो पाए।
--। खंदौली में बैंक में डाका पड़ा। यहां भी कैमरे लगे थे लेकिन बदमाश डीवीआर साथ में ले गए। एक कैमरा चिप वाला था लेकिन इसकी मेमोरी फुल थी।
--। ग्रोवर दंपति हत्याकांड में पुलिस ने ग्रोवर हाउस से सटे एक्सिस इमेजिंग सेंटर के कैमरे चेक गिए तो पता चला कि ये महीनों से बंद पड़े हैं।
पुलिस के कैमरे भी काम के नहीं
सीसीटीएनएस के तहत थानों पर कैमरे तो लगवा दिए गए हैं लेकिन इनमें दो कमी हैं। एक तो इनके मॉनिटर पर पुलिस की नजर नहीं रहती। दूसरा कई जगह कैमरे खराब पड़े हैं। पुलिस ने कई बार चौराहों पर भी कैमरे लगवाए हैं लेकिन रखरखाव न होने के चलते कुछ दिन बाद ही खराब हो गए।