शहर में एक और बिल्डर की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। बिल्डर ने छह साल पहले दुकानों का सौदा करने के बाद कब्जा नहीं दिया। मामले में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। कोर्ट में चार्जशीट दायर होने के बाद भी पुलिस उसकी गिरफ्तारी नहीं कर सकी। तब कोर्ट ने कुर्की नोटिस जारी किया। पुलिस ने आरोपी बिल्डर को 17 दिसंबर 2016 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जिला जज सरोज यादव ने आरोपी बिल्डर प्रथमेश जैन की जमानत अर्जी सोमवार को खारिज कर दी।
हीरा बाग, दयालबाग निवासी विष्णु अग्रवाल ने थाना रकाबगंज में 22 मार्च 2010 को तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि आकृति कंस्ट्रक्शन के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रथमेश जैन (छीपीटोला) से बालूगंज स्थित दो दुकानों को खरीदने के लिए सौदा किया था। उसने प्रथमेश को पूरा भुगतान कर रसीद प्राप्त कर ली, लेकिन बिल्डर ने एडीए से अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलने का बहाना बनाकर बैनामा नहीं किया। इसके बाद बिल्डर की शह पर कालीचरन गुप्ता ने दुकानों पर अवैध कब्जे का प्रयास किया।
इसकी शिकायत विष्णु ने थाने में की। तब कालीचरन ने बताया था कि उसने बिल्डर से दुकानों का बैनामा कराया है। विष्णु ने कब्जा रोकने के लिए कोर्ट में वाद दायर किया। कोर्ट के आदेश पर नियुक्त अमीन मौका मुआयना करने गया तो पता चला कि कालीचरन और प्रथमेश ने दुकान संख्या तीन और चार पर अवैध कब्जा किया है। मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था। वादी की तरफ से अधिवक्ताओं ने कोर्ट में बहस करते हुए कहा कि आरोपी बिल्डर जालसाज है। उसके खिलाफ धोखाधड़ी, धन हड़पने, चेक बाउंस के मामले थाना हरीपर्वत, शाहगंज, जगदीशपुरा और रकाबगंज में दर्ज हैं। उसके खिलाफ साक्ष्य भी पेश किए गए।