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भ्रूण लिंग परीक्षण में एजेंट हत्थे चढ़ी

Wed, 18 Jan 2017 12:06 AM IST
भ्रूण लिंग परीक्षण में एजेंट हत्थे चढ़ी
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भ्रूण लिंग परीक्षण में एजेंट हत्थे चढ़ी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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चिकित्सक की सतर्कता से लिंग परीक्षण कराने वाली एजेंट स्वास्थ्य विभाग के हाथ लगी है। इसने मरीज से आठ हजार रुपये लिए थे। स्वास्थ्य विभाग ने मरीज, एजेंट और चिकित्सक के बयान दर्ज कर रिपोर्ट डीएम को सुपुर्द कर दी है। 
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मामला रामबाग चौराहा स्थित संजीवनी हास्पिटल का है। यहां भरतपुर निवासी मानसिंह अपनी पत्नी मनीषा को लेकर करीब 12 बजे पहुंचा था। इनका आरोप है कि नंदलालपुर, खंदौली निवासी ममता उर्फ ज्योति नामक महिला से फोन पर बात हुई थी। उसने कोख में पल रहे भ्रूण का लिंग पता कराने के लिए रामबाग चौराहे पर बुलाया। यहां आने के बाद उससे 8,000 रुपये ले लिए। संजीवनी हास्पिटल पहुंचे और अल्ट्रासाउंड का फार्म भरा। एजेंट ने गर्भवती का पता खंदौली लिखवाया। गर्भवती से आईडी प्रूफ भी मांगा। इसी बीच अल्ट्रासाउंड होने के बाद एजेंट ने दंपति को वहां से भगा दिया। डाक्टर ने जब आईडी प्रूफ देखा तो वह भरतपुर का था। शक होने पर एजेंट को बैठा लिया। फार्म में दर्ज नंबर पर दंपति को फोन कर बुलाया। सख्ती से पूछताछ की तो पूरा मामला सामने आ गया। पीसीएनडीटी एक्ट प्रभारी एसीएमओ डा. वीरेंद्र भारती ने बताया कि रिपोर्ट डीएम को सौंपी गई है। आरोपियों पर पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। हास्पिटल संचालक और आईएमए के संयुक्त सचिव डा. भूपेंद्र प्रसाद ने बताया कि खुद आईएमए लिंग जांच कराने के खिलाफ अभियान चला रही है। भरतपुर से इतनी दूर अल्ट्रासाउंड कराने की तुक समझ से परे थी। इसलिए शक हुआ। 

शादी में मिला था एजेंट का नंबर 
गर्भवती के पति ने बताया कि आरोपी एजेंट का फोन नंबर एक शादी में मिला था। बताया कि बयाना में एक शादी समारोह में उसकी पत्नी गई थी। यहीं एक महिला ने उसका नंबर दिया था। बताया था कि ये बेटा-बेटी की जांच करा देगी।
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सप्ताह में दो-चार बार आती है
स्टाफ ने बताया कि यह महिला अल्ट्रासाउंड कराने के लिए सप्ताह में दो-चार बार आती है। इसका टेढ़ी बगिया से सटा नंदलाल पुर में दवाखाना भी चलाती है, ये दाई का कार्य भी करती है। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस आरोपों की जांच कर रही है।
आईएमए ने की डाक्टर की सराहना
एजेंट पकड़े जाने की सूचना पर आईएमए अध्यक्ष डा. आरएस कपूर, सचिव डा. मुकेश गोयल और कोषाध्यक्ष डा. आलोक मित्तल भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने अपनी टीम के सदस्य डा. प्रसाद के कार्य की सराहना की। अध्यक्ष ने कहा कि अगर सभी डाक्टर ऐसे सचेत रहें तो एजेंट आसानी से पकड़ में आ जाएंगे। 
हर बार राजस्थान से जुड़ते हैं तार 
पिछले छह महीने की बात करें तो आगरा में यह तीसरा मामला है जिसमें लिंग जांच कराने वाले गिरोह के तार राजस्थान से जुड़े हैं। ट्रांसयमुना कॉलोनी स्थित प्रिया हास्पिटल में भी भरतपुर का बार्डर की मरीज मिली थी। नालबंद चौराहा पर डा. अमित गुप्ता के यहां भी राजस्थान के मरीजों को पर्चे मिले थे। 2015 में भी कोठी मीना बाजार के पास से पकड़े गए दो एजेंट भी राजस्थान के थे। पूर्व में पकड़े गए एजेंटों ने खुलासा भी किया था कि राजस्थान में बेहद सख्ती के कारण इन्हें आगरा भेजा जाता है। 

फोन पर एक ही नंबर से कई बार बात
पुलिस-स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई में पकड़ी गई महिला के फोन पर एक नंबर से बार-बार फोन आ रहे थे। स्वास्थ्य विभाग ने उसके फोन की रिकार्डिंग सुनी तो उसमें एजेंट से एक व्यक्ति थाने से छुड़वा देने की बात कह रहा है। साथ ही उसने पिछली बार पकड़े जाने के बाद थाने से छुड़ाने के 10 हजार रुपये नहीं दिए जाने की भी बात कही। 
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इनसेट
इनके लिए हर कोख में ‘बेटी है’
आगरा। गर्भवती का अल्ट्रासाउंड सही लेकिन रिपोर्ट गलत। जी हां कोख के कातिलों का यह खेल बेटा हो या बेटी, दोनों की मौत का कारण बनता है।  सौदा तय होने और रुपये हाथ आने के बाद एजेंट गर्भवती का अल्ट्रासाउंड कराता है। फार्म और फीस भी खुद जमा करता है। अल्ट्रासाउंड के बाद हर गर्भवती को एजेंट बेटी होने की सूचना देता। इसके बाद गर्भपात करा दिया जाता है।  
लक्ष्मी-गणेश का रूप भी बताया 
संजय प्लेस स्थित डा. राकेश गुप्ता के यहां टीम ने छापा मारा था। यहां क्लीनिक पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर लगी हुई थी। अल्ट्रासाउंड होने के बाद चिकित्सक एजेंट कोे बेटा होने पर गणेश और बेटी होने पर लक्ष्मी की तस्वीर की ओर इशारा किया जाता था। 
नंबर 9-6 का खेल अजब
2015 में ट्रांस यमुना कॉलोनी में छापे में खुलासा हुआ कि यहां बेटा-बेटी बताने का अलग ही तरीका है। इसके लिए कोडवर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा था। नंबर 9 का मतलब गर्ल (अंग्रेजी वर्णमाला का जी) और नंबर 6 का मतलब ब्वाय (अंग्रेजी वर्णमाला का बी) है। स्वास्थ्य विभाग की टीम को यहां कई ऐसे पर्चे मिले, जिन पर नंबर 9 और नंबर 6 लिखा था। 
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