डौकी के नरि गांव स्थित आश्रम में पथरी की दवा लेने के बहाने से बाइक पर आए तीन युवकों ने आश्रम के चर्चित संचालक बाबा मुंशीदास निषाद ( 55) की गोली मारकर हत्या कर दी। बाबा ने उनसे नाम बताने के लिए कहा था। एक ने जैसे ही खुद को फिरोजाबाद का राजू बताया, वैसे ही दूसरे ने बाबा के सीने में तमंचे से गोली उतार दी। हमलावर तमंचे लहराते हुए बाइक से ही भाग निकले। उधर बाबा को आगरा के एक हास्पिटल ले जाया गया। वहां डाक्टरों ने मृत बताया। उसके भांजे सोनू ने गांव के ही छह लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है।
पुलिस को शक है कि मुंशीदास की हत्या के पीछे कोई रंजिश हो सकती है। बाबा डौकी थाना का हिस्ट्रीशीटर था। उसके खिलाफ हत्या, बलवा, सरकारी काम में बाधा, डकैती और रेप के प्रयास जैसे अपराध के 35 केस दर्ज थे। वह नरि गांव के ही किसान जयराम की दो साल पहले हुई हत्या में जेल गया था। इसमें उस पर गैंगस्टर एक्त भी लगा था। वह चार दिसंबर 2016 को ही जमानत पर जेल से बाहर आया था।
सोनू ने तहरीर में बताया है कि जयराम की हत्या का बदला लेने के लिए उसके बेटों ने रिश्तेदारों के साथ मिलकर बाबा की हत्या की है। उधर पुलिस ने चश्मदीदों से की गई पूछताछ के हवाले से बताया कि मुंशीदास के पास तीन युवक आए थे। उन्होंने पथरी के उपचार के लिए दवाई मांगी थी। मुंशीदास ने उनसे नाम लिखवाने के लिए कहा। इस पर तीनों बेहद करीब आ गए।
एक ने कहा कि फिरोजाबाद का राजू है। उसके ठीक पीछे खड़े उसके साथी ने तमंचे से बाबा के सीने में गोली मारी। इस पर बाबा चिल्लाया। अगले ही पल तीनों हमलावर बाइक से भाग निकले। उसके आश्रम में पथरी के उपचार समेत तमाम तरह की देसी दवाइयां दी जातीं थी। इन्हें लेने के लिए दूर दूर से लोग आते थे। पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान से हजारों की संख्या में मरीज आते थे।
-- मेला भी लगवाता था मुंशीदास
बाबा मुंशीदास अपनी ख्याति के लिए हर साल आश्रम पर यमुना नदी के किनारे नरि गांव में एक बड़ा मेला भी लगवाता था। इसमें दूर-दूर से लोग आते हैं। खास तौर से पथरी के उपचार की दवा लेने वाले।
-- बसपा के टिकट पर लड़ा था चुनाव
मुंशीदास 1993 में फतेहाबाद विधान सभा क्षेत्र से बसपा के टिकट पर चुनाव लडा़। वह पांचवे नंबर पर रहा। उसे 3683 वोट मिले थे। जमानत जब्त हो गई थी। इसके बाद दोबारा चुनाव नहीं लड़ा।