अरुण माहौर की हत्या पर रोष थम नहीं रहा है। पुलिस की नजरों से बचाकर शनिवार को विहिप और भाजयुमो ने मुख्यमंत्री के पुतले फूंके। हालांकि इस बीच पुलिसकर्मियों से प्रदर्शनकारियों की नोकझोंक भी हुई।
विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन सख्त हो गया है। ऐसे में भाजयुमो ने पुलिस को गुमराह करने के लिए पहले शंकरगढ़ की पुलिया, शाहगंज पर मुख्यमंत्री के पुतला फूंकने की घोषणा कर दी। इस पर काफी संख्या में पुलिस बल वहां तैनात कर दिया गया। मगर, भाजयुमो जिलाध्यक्ष सोनू चौधरी के नेतृत्व में कार्यकर्ता संजय प्लेस स्थित स्पीड कलर लैब के सामने पहुंच गए। पुलिस यहां भी उनका पीछा करते हुए पहुंच गई। वे कार्यकर्ताओं को खदेड़ने लगे। इसी बीच कुछ कार्यकर्ता मौका पाकर इनकम टैक्स ऑफिस सामने एमजी रोड पर पहुंच गए। वहां उन्होंने मुख्यमंत्री का पुतला फूंका। पुलिसकर्मी जब तक आ पाते पुतला जल चुका था। इस दौरान सत्यप्रकाश लोधी, लखन कुमार, पायल चौहान, सहदेव शर्मा, राहुल चौधरी, गौरव भार्गव आदि मौजूद थे।
इधर, विहिप के प्रांत सहसंपर्क प्रमुख रवि दुबे के नेतृत्व में नूरीदवाजा में मुख्यमंत्री का पुतला फूंका गया। पुलिस वहां भी पहुंच गई, इसके चलते प्रदर्शनकारी काफी देर तक इधर-उधर छुपे रहे। तय समय से लगभग दो घंटे बाद वे पुतला फूंकने में सफल रहे। इधर, विहिप के प्रांत मीडिया प्रभारी प्रमेंद्र जैन के मुताबिक, गोकशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर विहिप, बजरंग दल, भाजपा और आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने सभी जिला केंद्रों पर प्रदेश सरकार के पुतले फूंके। विरोध करने वालों में प्रांत उपाध्यक्ष सुनील पाराशर, ललित गर्ग, राकेश त्यागी, दीपक अग्रवाल आदि शामिल हैं।