संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में शनिवार को एडीएम सिटी धर्मेंद्र सिंह और एसपी सिटी सुशील घुले ने पुलिस बल के साथ छापा मारा। इससे दलालों में भगदड़ मच गई। पुलिस ने ड्राइविंग लाइसेंस के पटल से तीन दलालों को पकड़ लिया। इसके बाद अफसरों ने अन्य पटलों का निरीक्षण किया, लेकिन तब तक सभी पटलों से दलाल भाग निकले थे।
आरटीओ में अधिकारियों को लंबे समय से दलालों के कारण काम प्रभावित होने की शिकायतें मिल रही थीं। हर पटल मेें बाहरी व्यक्ति काबिज हैं, जो मोटा कमीशन लेकर काम कराते हैं। दोपहर एक बजे एडीएम सिटी, एसपी सिटी थाने के पुलिस बल के साथ कार्यालय पहुंचे। पुलिस ने सबसे पहले नई बिल्ंिडग में ड्राइविंग लाइसेंस पटल पर धरपकड़ शुरू कर दी। इस पर काफी दलाल तो लाइन में लगकर आवेदक बन गए, लेकिन तीन दलाल हत्थे चढ़ गए। इसी बीच छापे की खबर मिलते ही दलालों में भगदड़ मच गई। टैक्स समेत अन्य पटलों पर बैठे दलाल भाग खड़े हुए। कुछ ही देर में आरटीओ में ज्यादातर कुर्सियां खाली रह गईं। अफसरों ने विभिन्न पटलों में पहुंचकर कर्मचारियों से पूछताछ की। उनके साथ एआरटीओ प्रशासन नेहा द्विवेदी भी थीं। एडीएम सिटी ने कहा कि अब कार्यालय में समय समय पर छापेमारी की जाएगी। उन्होंने आरटीओ को कार्यालय को दलालों से मुक्त कराने के निर्देश दिए। आरटीओ प्रशासन डा. विजय कुमार ने कहा कि कर्मियों को परिचय पत्र जारी होंगे, ताकि बाहरी लोग नहीं आ सकें।
दो घंटे बाद फिर सक्रिय हो गए दलाल
छापा पड़ने के बाद आरटीओ के बाहर बैठे अधिकांश दलाल मेज कुर्सियां छोड़कर भाग निकले। लेकिन दो घंटे बाद ही फिर से सक्रिय हो गए। दलालों के भागने के बाद आरटीओ के अन्य पटलों पर भी कर्मचारियों ने काम नहीं किया। ज्यादातर कर्मचारी कामकाज के लिए दलालों पर ही आश्रित हैं।
कर्मियों की कमी का रोना रोया
आरटीओ प्रशासन ने अफसरों से कर्मचारियों की कमी का रोना रोया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में 80 से अधिक कर्मचारी थे, जोकि सिमटकर 22 रह गए हैं। ऐसे में कर्मचारियों की कमी के कारण बाहरी और रिटायर व्यक्ति अपनी सेवाएं दे रहे हैं।