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अंबेडकर विविः चीफ जस्टिस के पास पहुंचा फर्जी मार्क्सशीट घोटाला

Tue, 13 Oct 2015 01:57 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
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डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के फर्जी मार्क्सशीट प्रकरण में फंसे विवि अधिकारियों और कर्मचारियों की मुश्किल और बढ़ने जा रही है। हाईकोर्ट की ट्रायल बेंच की सिफारिश पर एक तो अब इस चर्चित मामले की सुनवाई सिर्फ रिट नहीं, बल्कि  पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) के रूप में  होगी। दूसरा, मामला ट्रायल बेंच से चीफ जस्टिस की कोर्ट में पहुंच गया है। मंगलवार की सुनवाई इसी अदालत में होनी है। माना जा रहा है कि घोटाले की व्यापकता को देखते हुए यह निर्णय हुआ है।
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अभी तक यह मामला ट्रायल कोर्ट ( कोर्ट संख्या 38) में सुनील कुमार बनाम डा. बीआर अंबेडकर विवि के नाम से चल रहा था। रिट मैनपुरी के सुनील कुमार ने दायर की थी। एसआईटी की रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट के सामने रखी जा चुकी है।
केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट के अध्ययन के बाद ही ट्रायल कोर्ट ने इसकी सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में स्पेशल बेंच गठित किए जाने या इसे चीफ जस्टिस कोर्ट में ट्रांसफर किए जाने की सिफारिश की। इस पर निर्णय हुआ कि 13 अक्तूबर की सुनवाई चीफ जस्टिस कोर्ट में होगी।
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गौरतलब है कि इस घोटाले में लगभग 25 हजार फर्जी मार्क्सशीट जेनरेट किए जाने की बात सामने आई थी। इनमें बीएड की लगभग 10 हजार डिग्री बताई जाती हैं। केस से जुड़े सूत्रों की मानें तो आरोपियों की संख्या 70 से 80 के बीच हैं। फर्जी डिग्री पाने वालों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो इनके सहारे सरकारी नौकरी पा चुके हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में पूरे प्रदेश में ऐसे सहायक अध्यापकों की जांच करा रहा है, जिनके पास डा. बीआर अंबेडकर विवि की डिग्री है।
सुनवाई में होगी सुनवाई
माना जा रहा है कि मामला चीफ जस्टिस कोर्ट में पहुंच जाने के बाद इसकी सुनवाई तेजी से हो सकेगी। आरोपियों को सम्मन पहले ही जारी हो चुके हैं।
हो सकती है गिरफ्तारी
केस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस घोटाले में कई ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं, जो अभी तक बचे हुए थे। इनकी गिरफ्तारी हो सकती है।
ये है प्रकरण
2005 से 2010 के बीच फर्जी मार्क्सशीट बनाकर छात्रों को दी गई। इन्हें विवि के गोपनीय चार्ट में भी दर्ज किया गया। बाद में पता चला कि 2010 के बाद भी यह खेल चला है। पिछले दिनों एसआईटी ने 2010 से 2013 तक का रिकार्ड भी तलब कर लिया था।
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