‘हमें कानून न समझाओ, हमारी रिहाई कराओ’
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उम्र कैद की सजा में 14 साल से अधिक कारावास में रह चुके 350 कैदियों की भूख हड़ताल सातवें दिन रविवार को भी जारी रही। उन्हें समझाने के लिए जिलाधिकारी गौरव दयाल सेंट्रल जेल पहुंचे। उन्हें शासन की ओर से किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया। लेकिन कैदियों ने दो टूक जवाब दिया कि उन्हें नियम-कानून से नहीं, अपनी रिहाई से मतलब है। रिहाई तक हड़ताल जारी रहेगी। जेल प्रशासन के अधिकारी कैदियों को पहले ही बता चुके हैं कि 104 कैदियों की लिस्ट आईजी जेल के पास जा चुकी है। इसे जल्द ही राजभवन भेजा जाएगा। यह भी बताया गया है कि कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया कैदियों की रिहाई के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कैदियों ने हड़ताल समाप्त नहीं की। बता दें, शनिवार को कारागार मंत्री ने राज्यपाल राम नाईक से मिलकर कैदियों की रिहाई के मुद्दे पर चर्चा की थी।
रिहाई में पुलिस की रिपोर्ट अहम
आगरा। जेल अधिकारियों ने बताया कि उम्र कैद की सजा का मतलब ताउम्र जेल में रहना ही होता है लेकिन कानून में प्रावधान है कि अच्छे आचरण वाले कैदियों को 14 साल जेल में रहने पर सरकार उनकी रिहाई करा सकती है। हालांकि इसका आदेश राज्यपाल जारी करते हैं। इसके लिए कैदियों को फार्म ए भरना होता है। इसमें उस थाना क्षेत्र की रिपोर्ट सबसे अहम होती है, जहां बंदी ने अपराध किया हो।
नेगेटिव रिपोर्ट देती है पुलिस
आगरा। पुलिस की रिपोर्ट ज्यादातर नेगेटिव ही होती है। कई रिपोर्ट में कहा गया है कि बंदी के अपने घर पहुंचने पर पीड़ित पक्ष के साथ तनाव हो सकता है। इसके अलावा कई रिपोर्ट में बताया गया है कि बंदी भले ही बुजुर्ग हो चुका है और स्वयं अपराध करने की स्थिति में नहीं है लेकिन वह दिमाग से शातिर है और अपराध की साजिश रच सकता है।
इसलिए अटकी है दया याचिका
आगरा। जेल अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार किसी बंदी की दया याचिका तब ही मंजूर की जा सकती है जब उसे सजा सुनाने वाला पीठासीन अधिकारी उसकी रिहाई की संस्तुति करे। इसके चलते दया याचिकाएं संबंधित पीठासीन अधिकारियों के पास भेजी जा रही हैं।