इलाहाबाद से आगरा के नारी निकेतन लाई गईं 43 सेक्स वर्कर को बगैर किसी आदेश के छोड़ने के आरोप में निलंबित चल रही नारी निकेतन की अधीक्षक गीता राकेश की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। सोमवार को उन्हें एक दिन की अंतरिम जमानत दी गई थी। उन्हें पहले दो-दो दिन की अंतरिम जमानत मिल भी चुकी है। मंगलवार को सरेंडर के बाद उनकी जमानत याचिका पर फिर सुनवाई हुई।
बता दें कि सोमवार को प्रभारी जिला जज अश्वनी कुमार त्रिपाठी की अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के समय डीजीसी शिशुपाल यादव और गुड़िया संस्था की ओर से अधिवक्ता मेघ सिंह यादव व गोपाल कृष्ण मौजूद रहे थे। मेघ सिंह और गोपाल कृष्ण ने पुलिस की ओर से की जा रही जांच के दौरान मिले साक्ष्य कोर्ट के सामने रखे। उन्होंने जमानत का विरोध किया था।
उधर गीता राकेश के अधिवक्ता की ओर से जमानत स्वीकार करने की अपील की गई। कहा गया कि जमानत स्वीकार न किए जाने की सूरत में 10 दिन की अंतरिम जमानत दी जाए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद एक दिन की अंतरिम जमानत दे दी थी। इसके बाद मंगलवार को उन्हें दोबारा कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने के आदेश भी दिए हैं।
बताया गया है कि गीता राकेश ने जिन सेक्स वर्कर को छोड़ दिया, वे नहीं मिल रही हैं। उनके नाम और पते भी फर्जी पाए गए हैं। ऐसे में यह प्रकरण बेहद गंभीर हो गया है। शासन तक इस बारे में पुलिस और प्रशासन से रिपोर्ट ले रहा है। बता दें, इस मामले में लापरवाही बरतने पर डीपीओ स्मिता सिंह को भी निलंबित किया गया था। बाद में हाईकोर्ट ने उनके निलंबन पर रोक लगाई।