केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड पर नगला बूढ़ी स्थित सीवेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) के नौ मीटर गहरे टैंक में सोमवार दोपहर उतरे चार लोगों में से जेई अंकित (24) और सफाईकर्मी करन (22) तथा सोनू ( 22) की मौत हो गई जबकि सफाईकर्मी दीपक (23) की हालत गंभीर बनी हुई है। उसका एसएन मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है। करन सफाई के लिए उतरा था। अंकित और सोनू की जान उसे बचाने की कोशिश में गई। माना जा रहा है कि यह दर्दनाक हादसा टैंक में जहरीली गैस (मीथेन) की भारी मात्रा की वजह से हुई।
सूचना दे दिए जाने के बाद भी पुलिस और फायर ब्रिगेड के सवा घंटे बाद पहुंचने से भड़के लोगों ने एसपीएस में तोड़फोड़ कर डाली। मृतकों के परिवारीजन एसएन मेडिकल कॉलेज में भी पुलिस से नोकझोंक हुई। वे शव ले जाकर रास्ता जाम करना चाहते थे। पुलिस ने उन्हें रोका तो कहासुनी हुई। एक एंबुलेंस में भी तोड़फोड़ की कोशिश की गई। डीएम पंकज कुमार ने उचित मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया, तब वे शांत हुए।
बता दें, जल निगम की यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने यह एसपीएस ठेके पर दे रखा है। दोपहर करीब डेढ़ बजे सफाई के लिए टैंक में उतरा किरावली निवासी सफाईकर्मी करन बेहोश हो गया। यह देख पहले नगला अजीता निवासी सोनू उतरा, फिर केके नगर निवासी जेई अंकित और फिर नगला बूढ़ा का दीपक। तीनों टैंक में लोहे की सीढ़ी के ऊपर दीवार से सटकर बनाए गए स्लैब पर बेहोश हो गए। गैस इतनी तेजी से फैल रही थी किअंकित का भाई सनी टैंक के ऊपर ही बेहोश हो गया।
बताया गया कि आमतौर पर सीवेज में केमिकल रिएक्शन से मीथेन बनती है और इसका असर पानी के तल से एक फुट ऊपर तक ही रहता है। यदि यह गैस ज्यादा मात्रा में बनी तभी और ऊपर आती है। बेहोश लोगों को निकालने उतरे दो दमकलकर्मियों को भी चक्कर आ गया। इसके बाद गैस का असर कम करने के लिए पानी की बौछार की गई। फिर चारों को एक -एक कर बाहर निकालकर एसएन मेडिकल कालेज भिजवाया गया। वहां चिकित्सकों ने दीपक को छोड़ शेष तीनों को मृत बताया। यह पता चलते ही लोगों का गुस्सा भड़क उठा। उनका आरोप था कि पुलिस और फायर ब्रिगेड की देरी से तीनों की जान गई।