एत्मादपुर के गांव भागूपुर के पास बीपी फ्लोर मिल में गुरुवार रात गेहूं के टैंक में गिरने से कर्मचारी की मौत हो गई। खबर मिलते ही मौके पर पहुंचे परिवारीजनों और ग्रामीणों ने मिल का का घेराव किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पंचायत में समझौता कराया। परिवारीजन बिना पोस्टमार्टम के ही शव ले गए।
घटना रात तकरीबन ढाई बजे की है। भागूपुर निवासी जनक सिंह का पुत्र मुन्नेश कुमार उर्फ मोनू (25) बीपी फ्लोर मिल (डबल त्रिशूल ब्रांड) में कार्य करते थे। गुरुवार रात आठ बजे वाली शिफ्ट में काम कर रहे थे। तभी तकरीबन ढाई बजे चक्की में गेहूं का आना कम हो गया। इसका पता लगाने के लिए मोनू पांचवीं मंजिल पर बने गेहूं के टैंक को देखने गए। इसके बाद नहीं लौटे। साथी कर्मचारी जब देखने पहुंचा तो टैंक में उनका हाथ दिखा। कर्मचारियों ने आननफानन में मशीनें बंद कर दीं और मोनू को बाहर निकाला गया। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने मोनू को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल पहुंचा मिल मालिक कर्मचारियों से शव गांव पहुंचाने की कह कर चला गया। लेकिन साथी कर्मचारी शव लेकर मिल पहुंच गए। तब तक वहां परिवारीजन और ग्रामीण भी पहुंच गए। मिल मालिक के न मिलने से उनका गुस्सा भड़क गया। सूचना पर पहुंचे इंस्पेक्टर राजा सिंह ने उन्हें समझाने की कोशिश की। बाद में मालिक के प्रतिनिधि के रूप कुछ लोग मौके पर पहुंचे और हाईवे स्थित एक ढाबा पर पंचायत कराई। लगभग एक घंटे चली पंचायत में पीड़ित परिवार को 15 लाख रुपये देने पर समझौता हो गया। इस दौरान भाजपा प्रदेश मंत्री रामप्रताप सिंह चौहान, सपा नेता राकेश यादव, नत्थीलाल यादव, राकेश बघेल प्रधान आदि मौजूद रहे।
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छह को बच्चे का नामकरण
- अभागा मोनू अपने नवजात पुत्र का नामकरण भी नहीं देख सका। बताते हैं कि छह अगस्त को बच्चे का नामकरण होना था। 27 दिन के मूल आए थे। घर में नामकरण की तैयारियां चल रही थीं। सगे-संबंधियों को निमंत्रण दिया जा रहा था।
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पिता पर फिर टूटा बज्र
- चार साल पहले जनक सिंह के बड़े पुत्र सोमवीर उर्फ सोनू की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। परिवार अभी उस दुख को नहीं भूला था कि गुरुवार रात दूसरे बेटे की भी मौत हो गई।
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मिल में श्रमिकों के साथ धोखा
- बीपी मिल में काम करने वाले श्रमिकों का श्रम विभाग में कोई पंजीकरण नहीं है। अधिकांश कर्मचारियों को श्रमिक एक्ट का लाभ नहीं मिलता है। जब कोई हादसा होता है तो कह दिया जाता है कि उक्त व्यक्ति श्रमिक नहीं है।