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10 लाख के लालच में रिश्ते की मामी ने कराया अपहरण

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आगरा। थाना जगदीशपुरा के बोदला स्थित नगला गूलर से अगवा चार साल के बालक शिव पुत्र मनोज को बुधवार को सकुशल मुक्त करा लिया गया। दस लाख के लालच में पड़ोस में रहने वाली रिश्ते की मामी ने ही उसका अपहरण कराया था। पुलिस ने बिचपुरी क्षेत्र से दो अपहरणकर्ता पकड़ लिए। बाद में महिला को पकड़ लिया गया।
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नगला गूलर निवासी मनोज के बेटे शिव का दो जून को अपहरण कर लिया गया था। वह घर के मोड़ पर आइसक्रीम खरीदने गया था। तभी अपाचे सवार दो युवक उसे उठाकर ले गए थे। परिवारीजन बेटे की तलाश में लगे थे।

एसएसपी दिनेश चंद्र दुबे ने बताया कि पांच जून की रात एक बजे मनोज के पास 20 लाख रुपये फिरौती के लिए फोन आया था। इसके बाद से पुलिस अपहरणकर्ताओं की तलाश में जुट गई थी। बुधवार दोपहर को अपहरणकर्ता बिचपुरी क्षेत्र में फिरौती लेने के लिए आए थे। उनकी घेराबंदी करके पकड़ लिया गया। इनमें दीपू जादौन (सारसौल, गभाना, अलीगढ़), सोनू (दहतोरा, सिकंदरा) और अनीता पत्नी महावीर (नगला गूलर, बोदला) हैं। पूछताछ में पता चला कि अनीता मनोज की रिश्ते की भाभी है। बच्चे की मामी लगती है। वह पड़ोस में रहती है।
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उसने ही रुपये के लालच में शिव को अगवा करवाया था। उसकी जान पहचान दीपू से थी। वह बोदला क्षेत्र में एक दुकान पर काम करता है। अनीता को पता था कि मनोज का काम अच्छा चल रहा है। उसे 30 लाख रुपये मिलने की उम्मीद थी। इसमें दस लाख अनीता रखती थी। बाकी अपहरणकर्ता अपने पास रखते है। योजना के तहत घटना वाले दिन दीपू और सोनू आए। तभी अनीता भी पहुंच गई। वह बच्चे के पास खड़े होकर आइसक्रीम खरीदने का नाटक करती रही।

शिव को उसकी मां मंतेश छत से देख रही थी। इसी बीच वह किसी काम से हट गई। तभी अनीता ने शिव का अपहरण करा दिया। अपहरणकर्ता उसे सबसे पहले दहतोरा ले गए। सोनू ने उसे अपने घर रखा। तीन जून को अलीगढ़ ले जाकर रखा। पांच जून को फिरौती मांगी गई। उसे रकम देने के लिए अभी समय नहीं दिया गया था। इससे पहले ही पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया। परिवार के सदस्य की तरह अनीता थी। उसने ही मनोज का रिश्ता मंतेश से कराया था। शिव पैदा हुआ तो उसकी देखभाल में भी वही आगे रही। अनीता का पति आढ़त का काम करता है। मगर, मनोज के काम को देखकर वह मन ही मन जलती थी। अपहरण के बाद भी अनीता मनोज के घर आ रही थी।

मनोज की समझदारी काम आई
मनोज के पास जब आरोपियों ने फिरौती के लिए फोन किया तो उसने समझदारी दिखाई। पहले दिन फोन आने पर कहा कि बच्चे से बात कराओ। इसलिए छह जून को आरोपियों ने फोन किया। बच्चे से बात कराई। मनोज को आशंका था कि कोई गलत आदमी भी उनके पास फोन कर सकता है। कहीं रिकॉर्डिंग तो नहीं सुनाई जा रही है। इसलिए बच्चे से अपना नाम भी पूछा। घर के बारे में भी पूछा। यकीन होने पर ही उनसे आगे बात की।

आरोपियों ने उससे कहा था कि वह फोन करें, तब हरिद्वार की ट्रेन में बैठ जाना। रास्ते में फिर से फोन करेंगे कि रुपयों से भरा थैला कहां पर फेंकना है। छह जून को भी छह बार फोन किया। इस दौरान मनोज ने उनसे समय भी मांगा और बातों में फंसाए रखा। इसकी जानकारी पुलिस को भी दे दी। पुलिस सर्विलांस की मदद से उनकी तलाश में लगी हुई थी। उसने इस बारे में घर के अन्य लोगों को नहीं बताया। उसे पहले ही शक था कि आरोपियों तक उनकी बात कोई पहुंचा रहा है।
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