आगरा। भरतपुर हाउस गोलीकांड की नए सिरे से जांच यूं ही नहीं कराई जा रही है। पुलिस अफसरों ने थाना हरीपर्वत पुलिस की जांच में 10 बड़ी कमियां पाई हैं। हैरानी की बात यह है कि जूता कारोबारी राजकुमार लालवानी की हत्या में नामजद डिब्बा कारोबारी स्वदेश कुमार उर्फ गागा का बयान तक दर्ज नहीं किया। उसे क्लीन चिट दे दी गई। पुलिस ने उसके मोबाइल की कॉल डिटेल तक नहीं देखी।
20 जून 2016 को भरतपुर हाउस में राजकुमार लालवानी की कोठी में उनकी हत्या की गई थी। राजकुमार की पत्नी निर्मला की ओर से दर्ज एफआईआर में सराफ संजीव रस्तोगी, उनका ड्राइवर रवि और दोस्त गागा को नामजद कराया गया था। वारदात से थोड़ी देर पहले कालोनी के गेट के रजिस्टर में गागा की एंट्री पाई गई थी।
उस समय पुलिस के आला अफसरों तक ने कहा था कि गागा पर कार्रवाई की जाएगी लेकिन बाद में चुपके से क्लीन चिट दे दी थी। चार्जशीट सिर्फ संजीव के खिलाफ लगी थी। अब एसपी क्राइम मनोज सोनकर ने केस डायरी का अध्ययन किया तो पुलिस की जांच की कमियां सामने आई। उन्होंने इसकी रिपोर्ट एसएसपी दिनेश चंद दुबे को दी है।
इसके मुताबिक पुलिस संजीव, रवि और गागा के फोन की सीडीआर तक नहीं निकलवाई। फील्ड यूनिट से मौका मुआयना की रिपोर्ट नहीं ली। पुलिस ने हत्या की वजह पैसे का लेन देन बताया लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि लेन-देन किस तरह का था।
गागा का कथन तक अंकित नहीं किया गया। बता दें, गागा बड़ा कारोबारी है। पुलिस ने घटनाक्रम इस तरह बताया, राजकुमार की कोठी से संजीव उनकी संपत्ति के कागजात लेकर भाग रहे थे। इससे गुस्से में आकर राजकुमार ने उन्हें पीठ पर दो गोली मारी। इसकेबाद संजीव ने राजकुमार से रिवाल्वर छीनकर उनकी कनपटी पर गोली मारी। इससे राजकुमार की मौत हो गई।
पुलिस ने यह नहीं बताया कि किस संपत्ति के कागजात लेकर भागे थे संजीव। उन्हें गिरफ्तार किया गया, लेकिन कागजात बरामद नहीं किए गए। जिस कोठी का विवाद बताया गया, उसके स्वामित्व के कागजात तक नहीं देखे। अब देखना यह है कि एसपी क्राइम नए सिरे से जो जांच कर रहे हैं, वह किस नतीजे पर पहुंचती है।
फोरेंसिक रिपोर्ट में कुछ खास नहीं निकला
आगरा (ब्यूरो)। पुलिस ने घटना के बाद संजीव, राजकुमार और रवि के हाथों को केमिकल से धुलवाकर सैंपल लिया था। इसे फोरेंसिक साइंस लैब भेजा था। परीक्षण यह होना था कि किसके हाथ में बारूद के कण आते हैं और किसके में नहीं। यह अहम साक्ष्य होता लेकिन सैंपल लेने में चूक हो गई थी। यही वजह रही कि तीनों सैंपल में से किसी में बारूद के कण नहीं पाए गए। पुलिस ने संजीव और राजकुमार की लाइसेंसी रिवाल्वर भी परीक्षण के लिए भेजी थी। इसमें पाया गया कि राजकुमार की रिवाल्वर से गोली चली थी, संजीव की से नहीं।
भरतपुर हाउस की घटना की नए सिरे से जांच कराई जा रही है। इसमें कुछ वक्त लग सकता है लेकिन इस बार हर बिन्दू पर मुकम्मल जांच होगी - दिनेश चंद दुबे, एसएसपी।