फिरोजाबाद। करोड़ों के खेल में महिला कारोबारी के नंबर दो के कारोबार का परत दर परत खुलासा हो रहा है। चूड़ी, कांच, केमिकल के काम में महिला कारोबारी की पर्ची और चेक के रुप में अपनी मुद्रा चलती है। समयावधि समाप्त होने तक चेक कैश नहीं होता तो एक व्यापारी से दूसरे व्यापारी तक करेंसी के रुप में घूमता रहता है।
इसके अलावा महिला कारोबारी के जरिए हवाला के रुप में करोड़ों का लेनदेन होता है। जानकार बीसी, सिक्सा, कार्ड, हवाला के रुप में करीब सौ करोड़ रुपये के लेनदेन का मामला बताते हैं। पूरा खेल कमीशन पर है।
एक दशक पहले फिरोजाबाद में ड्राफ्ट का कारोबार बड़े पैमाने पर था।
बाहर से व्यापारी कैश न लाकर ड्राफ्ट के रुप में रकम लाते और ड्राफ्ट बैंक में नहीं ड्राफ्ट का कारोबार करने वालों के यहां कैश होता था। एक हजार रुपये के ड्राफ्ट पर 100 या 150 रुपये कमीशन काट कर ड्राफ्ट का काम करने वाले पैसा देते थे। तब भी महिला कारोबारी का ड्राफ्ट का सबसे बड़ा काम था।
बैंकों की सांठगांठ से चल रहे इस अवैध कारोबार का आयकर विभाग ने संज्ञान लिया तो ड्राफ्ट के काले कारोबार पर अंकुश लगा। इसके बाद शुरू हुआ हवाला से रकम के आदान प्रदान का काम। महिला कारोबारी का नेटवर्क यूपी, महाराष्ट्र, गुजरात, जयपुर और दक्षिण प्रांत के शहरों तक फैला है। महिला कारोबारी से जुड़े शहर के एक हजार से अधिक व्यापारी, चूड़ी और कांच कारखानेदार हवाला के जरिए करोड़ों का लेनदेन करते हैं।
महिला कारोबारी के गायब होने से इन कारोबारियों की नींद उड़ गई है।
महिला कारोबारी का सेल्फ चेक चलता है करेंसी के रुप में
फिरोजाबाद। बतौर उदहारण यहां के किसी व्यापारी को महाराष्ट्र से दस लाख रुपये लाने हैं तो व्यापारी दस लाख रुपये न लाकर महिला कारोबारी को फोन करता है।
महिला कारोबारी तुरंत उसके मोबाइल पर कोई कोड नंबर भेजती है। कोड नंबर उसे बताया जाता है जो महिला कारोबारी का एजेंट है और कोड बता कर व्यापारी से पैसा ले जाता है। व्यापारी शहर लौट आता है और यहां महिला कारोबारी से महाराष्ट्र में दी गई रकम के चेक लेता है। अधिकांश चेक सेल्फ के होते हैं।
फिर चेक लेने वाले व्यापारी को यहां जिसे पैसा देना है कैश देने की बजाए महिला कारोबारी का दिया चेक देता है। चेक कुल रकम में से दो प्रतिशत काट कर दिया जाता है। इसके बाद यही चेक कारोबार क्षेत्र में एक से दूसरे कारोबारी तक घूमता रहता है।
समयावधि खत्म होने की तारीख से पहले जिस भी आखिरी व्यक्ति के हाथ में चेक पहुंचता है। वो महिला कारोबारी के पास चेक ले जाता है। महिला कारोबारी दो प्रतिशत कमीशन काट कर भुगतान कर देती हैं। यानी एक ट्रांजेक्शन पर करीब पांच प्रतिशत कमीशन है। यह ट्रांजेक्शन लाखों-करोड़ों में होता है। चूंकि महिला कारोबारी का चेक करेंसी के रुप में चलता है। इसलिए हर कोई विश्वास पर चेक को करेंसी मान कर भुगतान के रुप में लेने से संकोच नहीं करता है।