सिपाही अजय यादव की हत्या से उसके दो साथी भड़क गए। इतने गुस्से में आ गए एक अधिकारी को वारदात के लिए जिम्मेदार ठहराने लगे। बोले, सीओ फतेहाबाद एके सिंह उन पर दबाव बना रहे थे। अपराधी पकड़ने के लिए टारगेट दे रहे थे। वारदात के खुलासे के लिए अल्टीमेटम दिए जा रहे थे। पूरा न होने पर एक्शन की धमकी भी थी। इसी से वे तीनों टेंशन में चल रहे थे। जो भी अपराधी मिल रहा था, उसे पकड़ रहे थे। बदमाशों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करा रहे थे। सीओ के दबाव के चलते कई अपराधियों से दुश्मनी हो गई। यही दुश्मनी अजय यादव की हत्या की वजह बनी है।
इन सिपाहियों में एक है रियाज और दूसरा मदन है। दोनों अजय के साथ रहते थे। इनका शमसाबाद थाना में आगरा शहर से तबादला भी उसी के साथ हुआ था। तीनों पहले क्राइम ब्रांच में भी रहे थे। अजय की हत्या से चार घंटे पहले तक उसके साथ थे। उसकी हत्या की खबर सुनते ही आपा खो बैठे। जीजी नर्सिंगहोम में रोते बिलखते समय अफसरों पर उंगली उठाने लगे।
मीडियाकर्मियों को देखा तो सीओ फतेहाबाद एके सिंह को निशाने पर ले लिया। दोनों सिपाहियों ने अलग-अलग कहा कि बहुत परेशान चल रहे थे हम। पूरी बात तो बता भी नहीं सकते। सीओ साहब कार्रवाई की धमकी देते थे। उनके टारगेट पूरे करने में लगे रहते थे। अपराधियों से धमकी भी मिल रही थी। इन सबका नतीजा यह हुआ कि हमारा बहादुर सिपाही हमारे बीच से चला गया। उसके बिछड़ने का गम बर्दाश्त नहीं हो रहा। अधिकारियों को इतना दबाव नहीं बनाना चाहिए।
देव चौधरी गिरोह पर जताया शक
आगरा। अजय यादव, रियाज और मदन भी उस पुलिस टीम में शामिल रहे थे जिन्होंने न्यू आगरा में प्रमुख सचिव की बहन के घर पड़ी डकैती का खुलासा किया था। इस मामले में मुरादाबाद का देव चौधरी गिरोह पकड़ा गया था। इस गिरोह के सदस्य तीन महीने पहले कानपुर में भी पकड़े गए हैं। कुछ आगरा जेल में बंद हैं। इन्हें न्यू आगरा थाना से गिरफ्तार किया गया था। रियाज ने बताया कि आगरा जेल से कुछ बदमाश जमानत पर छूटे हैं। बकौल रियाज, उन्हें एक मुखबिर ने उनसे मिलकर सूचना दी थी कि देव चौधरी गैंग उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। उसके निशाने पर वह पूरी टीम बताई गई थी जो न्यू आगरा डकैती कांड के खुलासे में शामिल रही थी। आशंका है कि उसी गिरोह के बदमाश ने हत्या की है।
वारदात में हो सकता है जानकार का हाथ
आगरा। सिपाही अजय यादव की हत्या में उनके जानकारों का हाथ माना जा रहा है। इसकी दो वजह हैं। एक तो यह कि वह उनके साथ आ रहे थे। दूसरा, तीन में से एक को अपनी बाइक पर पीछे बिठा रखा था। तीसरा, माना जा रहा है कि चारों मेले से आ रहे थे। अगर अजय उन्हें जानते न होते तो उनके साथ न आते। उनकी जान को खतरा था। कई अपराधियों से पंगा ले रखा था। इसलिए एहतियात से चलते थे। ऐसे में उसी के साथ आते जाते थे जिस पर बहुत भरोसा करते थे। कुछ दिन पहले धमकी भी मिली थी। इसके बाद तो और चौकन्ना हो गए थे। साथ में पिस्टल रखते थे। हालांकि फिलहाल सिर्फ अनुमान लगाया जा रहा है।
कॉल डिटेल से खुल सकता है राज
आगरा। अजय यादव की हत्या के खुलासे के लिए पुलिस उनके मोबाइल की कॉल डिटेल भी निकलवाएगी। इससे दो तरह के सुराग मिल सकते हैं। एक तो हत्या से पहले उनकी किन किन लोगों से बात हुई। हो सकता है कि जिन लोगों के साथ आ रहे थे, उनमें से किसी से फोन पर बात हुई हो। ऐसा हुआ तो बड़ा सुराग मिल जाएगा। दूसरा, उनके मोबाइल की लोकेशन के साथ बदल रहे मोबाइलों की लोकेशन का पता चलेगा। जिस जगह वारदात हुई है, वहां कुछ ही दुकान हैं। वाहनों का आवागमन बहुत ज्यादा नहीं था उस समय। उनके मोबाइल लोकेशन के साथ जिन लोगों के मोबाइल लोकेशन बदलती रही होगी, उनमें से कातिलों का पता लगाया जा सकता है।
बागी सिपाहियों पर कार्रवाई तय
आगरा । दो सिपाहियों ने बागी तेवर दिखा तो दिए लेकिन उन्हें यह भारी पड़ सकता है। अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह ने इसकी पूरी जानकारी ली है। और भी अफसर सिपाहियों के रवैये से नाराज बताए जा रहे हैं । एक अधिकारी ने दोनों सिपाहियों को पास बुलाकर कहा भी कि उन्हें इस तरह शोर नहीं मचाना चाहिए था। अगर कोई बात थी, तो अधिकारियों को बताते। अनुशासन का ख्याल रखना जरूरी है। इसके बाद भी सिपाही अपने मन की बात खुलकर सबके सामने कहते रहे।