एटा में पिछले साल जुलाई में जहरीली शराब कांड में जान गंवाने वाले 33 लोगों के शवों की विसरा परीक्षण रिपोर्ट सामने आ गई है। इससे पता चला है कि मृत्यु का कारण मिथाइल एल्कोहल रहा था। इस घटना में कुल 44 लोगों की जान गई थी। सभी ने एक साथ शराब पी थी। 11 लोगों की फर्रुखाबाद जिले में मौत हुई थी। माना जा रहा है कि उनकी मृत्यु का कारण भी मिथाइल एल्कोहल का सेवन रहा।
आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला में 33 शवों के विसरा को परीक्षण के लिए भेजा गया था। पुलिस की लापरवाही के चलते विसरा देरी से भेजे गए। इसके बाद अफसरों की ओर से केस को प्राथमिकता पर लेने के लिए नहीं कहा गया। लैब के नियम के मुताबिक केस नंबर के हिसाब से परीक्षण किया जाता है। विसरा में एक साल पुराने केस भी लंबित हैं। इसके चलते परीक्षण देरी से हुआ। अब इसकी रिपोर्ट आ गई है। लैब के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि विसरा में मिथाइल एल्कोहल पाया गया है। यही मृत्यु का कारण रहा। यह जहरीला होता है। बता दें, इथाइल एल्कोहल को शराब बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। देखने में इथाइल और मिथाइल एक जैसे ही होते हैं। इनमें फर्क करना आसान नहीं। कच्ची शराब बनाने वाले एल्कोहल के टैंकरों से चोरी करके एल्कोहल लेते हैं। इथाइल की जगह मिथाइल इस्तेमाल कर लिए जाने पर इस तरह की घटना हो जाती हैं। एटा में 44 लोगों की जान चली गई थी। इनमें 33 एटा में मरे थे। 11 की मौत फर्रुखाबाद में हुई थी। इन लोगों ने 16 जुलाई 2016 को शराब पी थी।
छिन जाती है आंखों की रोशनी
आगरा। मिथाइल एल्कोहल शरीर में जाते ही सबसे पहले सबसे कमजोर नसों पर अटैक करता है। यह आंखों की होती हैं। इसलिए इसके असर से सबसे पहले आंखों की रोशनी चली जाती है। एटा कांड में भी यही हुआ था। लोगों की आंखों की रोशनी छिन गई थी।
कच्ची शराब में मिला रहे यूरिया
आगरा। जहरीली शराब कांड के बाद एटा से शराब से 100 सैंपल भेजे गए थे। इनकी जांच अब की जा रही है। इनमें नौसादर और यूरिया पाया जा रहा है। लैब के वैज्ञानिकों का कहना है कि शराब का नशा बढ़ाने के लिए यूरिया का इस्तेमाल किया जा रहा है।
किडनी फेल होने का है खतरा
आगरा। लैब के वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरिया से नशा बढ़ने के साथ ही यह शरीर के लिए खतरनाक होता है। ऐसी शराब लिवर के साथ किडनी को भी नुकसान पहुंचाती है। किडनी फेल होने का भी खतरा रहता है।