मथुरा। भूमाफियाओं के चिन्हीकरण में भी बड़ा खेल कर दिया गया है। जिले में भूमि पर कब्जे हो रहे हैं लेकिन प्रशासन केवल तीन माफियाओं की ही तलाश कर सका है। यह भी वह हैं जो प्राइवेट जमीनों पर विवादों को लेकर नामजद थे। सूत्रों का कहना है कि कुछ माफियाओं को सत्ता का संरक्षण मिल गया जिसके चलते प्रशासन इन पर हाथ डालने में कतरा रहा है।
योगी सरकार सरकारी संपत्तियों पर कब्जे को लेकर पहले ही आदेश जारी कर चुकी है। इसके अनुपालन में जनपद भर में सभी विभाग अपनी संपत्तियों पर कब्जे की रिपोर्ट प्रशासन को भेज रहे हैं। इसी प्रक्रिया में डीएम ने पुलिस प्रशासन से भी जनपद में चिंह्ति भू-माफियाओं की लिस्ट मांगी थी। इस लिस्ट के मुताबिक जनपद में सिर्फ तीन भू-माफिया हैं। प्राइवेट जमीनों पर विवादों के चलते दर्ज मुकदमों के आधार पर इन्हें चिंह्ति किया गया है। यह तीनों ही लोग गोवर्धन और वृंदावन थाना क्षेत्र से जुडे़ हैं।
प्रशासन की लिस्ट के मुताबिक रोहन सिंह निवासी भवनपुरा गोवर्धन हिस्ट्रीशीटर है। उस पर जमीनों से जुडे़ करीब एक दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। भवनपुरा गोवर्धन के ही कन्हैया पर भी आधा दर्जन मुकदमे बताए जाते हैं। वृंदावन की मधुवन कालोनी निवासी विकास अरोड़ा पर भी जमीनों के विवादों में चर्चित नाम है।
इनके अलावा मथुरा में तो उन भू-माफियाओं की लिस्ट लंबी है, जिन्होंने सरकारी तंत्र से मिलकर सरकारी सम्पत्ति को कब्जाया है। पिछले 20 साल के रिकार्ड को खगोले तो मथुरा नगर निगम की अधिकांश जमीन को मिलकर मुफ्त में बांट दिया गया है।
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक जनपद में तीन भू-माफिया पंजीकृत हैं। इसकी सूचना शासन को भेज दी गई है।
अजय कुमार अवस्थी, एडीएम, प्रशासन