मैनपुरी। जिले से चोरी हुए शस्त्र भी निकाय चुनाव के दौरान प्रशासन की मुसीबत बढ़ा सकते हैं। पुलिस अभी तक चोरी गए असलहों का पता नहीं लगा सकी है। वर्ष 2016 से अभी तक तीन घटनाओं में चार असलाह चोरी के मामले दर्ज हैं। इधर, चुनाव के मद्देनजर इसे लेकर खुफिया विभाग भी सतर्क है।
निकाय चुनाव को लेकर शत प्रतिशत शस्त्र जमा कराए जाने की प्रशासन की कवायद जहां अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। वहीं चोरी गए शस्त्र भी दुश्वारियां बढ़ा रहे हैं। तमाम प्रयासों के बाद भी पुलिस अभी तक चोरी गए शस्त्रों के बारे में पता नहीं लगा सकी है। खुफिया तंत्र भी जानकारी जुटाने में नाकाम साबित हुआ है।
बता दें कि वर्ष 2016 में कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला छपट्टी स्थित एक घर में नकब लगाकर चोरी की वारदात हुई थी। चोर एक रिवाल्वर भी उठा ले गए थे। जिसका अभी कोई पता नहीं लग सका है।
वहीं मोहल्ला राजा का बाग निवासी एक गैस एजेंसी संचालिका के घर में चोरी के दौरान चोर उनके भाई की रिवाल्वर और कारतूस भी गए थे। इसके बारे में भी पुलिस कोई जानकारी नहीं जुटा सकी।
वर्ष 2017 में भाजपा के पूर्व विधायक रहे अशोक चौहान के आवास के बाहर खड़ी कार का शीशा तोड़कर राइफल और बंदूक चोरी हो गई थी। पुलिस और खुफिया विभाग ने शस्त्र बरामदगी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। पर, बरामदगी के नाम पर हाथ खाली ही रहे।
तीन चोरी की वारदातों में कुल चार शस्त्र और कारतूस चोरी हुए। ये असलहे निकाय चुनाव में प्रशासन के लिए मुसीबत बन सकते हैं।
एएसपी ओमप्रकाश सिंह कहते हैं कि शस्त्र चोरी के मामले दर्ज हैं। थाना पुलिस के साथ ही मुखबिर तंत्र भी सक्रिय किया गया है। चोरी गए असलहों की तलाश की जा रही है।