मथुरा। सियासी संरक्षण में रामवृक्ष बहुत ताकतवर हो गया था। उद्यान अधिकारी की रिपोर्ट पर बिजली विभाग ने जनवरी, 2016 में जवाहरबाग का बिजली कनेक्शन काट दिया था। लेकिन दो घंटे में ही कनेक्शन फिर से जोड़ दिया गया था।
उद्यान विभाग के कर्मियों ने सीबीआई को जो बयान दिया उसमें कहा है कि बिजली की चोरी बढ़ रही थी जिसके कारण कनेक्शन कटवाया गया था।
स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह यात्रा लेकर रामवृक्ष यादव मार्च, 2014 में मथुरा आया था। उसने दो दिन के सत्याग्रह की अनुमति प्रशासन से मांगी थी।
दो दिन की अनुमति लेकर जवाहरबाग में दाखिल हो गया और फिर निकला ही नहीं। 160 एकड़ में फैले जवाहरबाग पर उसने कब्जा कर लिया था। उद्यान अधिकारी का आफिस भी जवाहरबाग में ही था। कब्जाधारियों ने उद्यान कर्मियों को धमकाना शुरू कर दिया। उनके साथ मारपीट की जाने लगी।
जवाहरबाग में कब्जाधारियों ने तंबू गाढ़ लिए थे जिसमें बिजली इस्तेमाल की जा रही थी। जब बिजली की चोरी बढ़ी तो तत्कालीन उद्यान अधिकारी मुकेश कुमार ने अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर कनेक्शन काटने को कहा।
बिजली विभाग की टीम दोपहर को पहुंची और कनेक्शन काट दिया। कनेक्शन कटते ही जवाहरबाग में लगे नलकूप भी बंद हो गए। क्योंकि कब्जाधारी भी इन्हीं नलकूपों का प्रयोग कर रहे थे लिहाजा उनके सामने पानी का संकट हो गया।
रामवृक्ष ने उसी वक्त अपने समर्थकों के साथ जवाहरबाग के गेट पर आकर हंगामा किया था। उसने एलान किया था कि वह कनेक्शन को जुड़वाकर रहेगा। दो घंटे के भीतर ही कटा कनेक्शन जोड़ दिया गया था।