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अमर उजाला फाउंडेशन के कैंप में 157 ने किया रक्तदान

Wed, 15 Jun 2016 02:12 AM IST
अमर उजाला अागरा
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रक्तदान - फोटो : amar ujala
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दूसरों की मदद ही सच्ची इंसानियत और रक्तदान कर किसी की जान बचाने से बढ़िया भला मदद का और क्या जरिया होगा। कलवारी के सुनील चाहर समेत रक्तदान को आए सभी के यही विचार रहे। बाप-बेटे, पति-पत्नी तो कोई दोस्तों के साथ रक्तदान करने आया। युवाओं की भागेदारी सर्वाधिक रही तो महिलाएं-बुजुर्ग भी पीछे नहीं रहे। इतना जरूर है, ऐसे महादानियों के होते हुए रक्त के अभाव में किसी की सांसों की डोर नहीं टूटेगी। विश्व रक्तदाता दिवस पर फाउंडेशन के कैंप में 157 ने महादान किया। अमर उजाला कार्यालय में 80, एसएन मेडिकल कालेज ब्लड बैंक में 45 और जिला अस्पताल ब्लड बैंक में 32 यूनिट रक्त जमा हुआ। रक्त की ये यूनिटें कैंसर, एड्स, एनमिक गर्भवती, थेलेसीमिया, लावारिस मरीजों की जिंदगी बचाने के काम आएंगी।  
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इनका रहा सहयोग:
अमर उजाला कार्यालय में डा. हरेंद्र यादव, डा. अवनीश कुमार, डा. नूतन दीक्षित, डा. रविराजा पाटिल, काउंसलर प्रमोद कुमार, अनवर खान, दामोदर सिंह, अमित कुलश्रेष्ठ, अनुज कुमार, प्रभात मिश्रा रहे। एसएन में डा. नीतू चौहान, डा. निधि और रोहित रहे। जिला अस्पताल में प्रमुख अधीक्षक डा. प्रमोद गुप्ता, डा. नरेंद्र मोहन शर्मा, विश्वराज गौतम ने व्यवस्थाएं संभाली। 

पहली बार जरूर... आखिरी बार नहीं
पवन सिंह, मयंक शर्मा, शुभम शर्मा, स्पर्श शर्मा, आकाश श्रीवास्तव दोस्तों का ये ग्रुप एक साथ रक्तदान करने आया। बोले, भइया... पहली बार जरूर है, लेकिन आखिरी बार नहीं। डीईआई के छात्र आजाद, अनंत और मयंक खत्री के अलावा जगमोहन रावत, मनीष गौतम, प्रदीप चौहान, जसवंत बघेल इनके भी यही विचार रहे। विद्युत विभाग से सेवानिवृत्त एमपी सिंह बोले 65 साल उम्र है, इसके बाद डाक्टर रक्त देने की मनाही करते हैं, तो भला अंतिम मौका क्यों चूकूं।  
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हीमोग्लोबिन कम, नहीं दे सके ब्लड
शास्त्रीपुरम की प्रियंका सरीन का हीमोग्लोबिन 9.7 ग्राम/डेली था, चिकित्सकों के अनुसार कम से कम ये मात्रा 12 ग्राम/डेली होनी चाहिए। इसके चलते ये रक्तदान नहीं कर सकीं। कैलाशपुरी की सौम्या जैन भी इनमें से एक रहीं। इनका हीमोग्लोबिन 9.1 ग्राम/डेली रहा। प्रियंका के पिता सुभाष चंद नारंग भी ब्लड देने आए, लेकिन इनकी उम्र 67 रही। ऐसे ही दयालबाग के सुधीर टंडन रहे, इनकी हाई ब्लड प्रेशर की दवा चल रही थी। रक्त भले ही न दिया हो, लेकिन इनकी कोशिश को सलाम।

हर कैंप में करने आते हैं रक्तदान
बाह के मोहर सिंह तोमर पिछले दो सालों से फाउंडेशन के हर कैंप में रक्तदान करने आ रहे हैं। जुनून ऐसा कि खबर पढ़ते ही सबसे पहले कार्यालय आ गए। खेरिया मोड़ के रोहित उपाध्याय 13वीं बार रक्तदान करने आए। बोले, ब्लड कैंसर से ताऊ जी की मौत देखी थी, तभी से नियमित रक्तदान का संकल्प ले लिया।  
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