राया (मथुरा)। जातीय संघर्ष के डर से नगला चंदू क्षेत्र में सैकड़ों ग्रामीण अपने घर से पलायन कर गए हैं। 50 से अधिक घरों पर ताले लटक गए हैं। गांव तंबका में भी तनावपूर्ण स्थिति है। वहीं, नगला चंदू में लोग भयभीत हैं। अनहोनी की आशंका से पुलिस एवं पीएसी के जवान मुस्तैद हैं। पुलिस के अफसर पल-पल की स्थिति पर निगाह बनाए हुए हैं।
गांव तंबका के निवासी बनी सिंह 29 मई को गांव नगला चंदू निवासी साहूकाल के पास पैसों का तगादा करने गया था। लेकिन, वह उसी दिन घायल हालत में सड़क किनारे पड़ा मिला था। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे परिजन उसे मथुरा और फिर आगरा के अस्पताल ले गए।
31 मई को मृतक केे पुत्र गजेंद्र उर्फ गुड्डू ने नगला चंदू निवासी साहूकाल समेत पांच लोगों के खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज करा दिया था। 2 जून की रात इलाज के दौरान आगरा में बनी सिंह की मौत हो गई। जिसके बाद गांव तंबका का माहौल गर्मा गया।
3 जून को बनी सिंह के अंतिम संस्कार से पहले सैकड़ों लोग रोड पर उतर आए और हंगामा कर जाम लगाने की कोशिश करने लगे। इस पर सहारनपुर की घटना से सबक लेते हुए एसएसपी विनोद कुमार मिश्रा ने लोगों को समझाबुझा कर वापस किया और तंबका व नगला चंदू में पीएसी और पुलिस की तैनाती कर दी।
उधर, जातीय संघर्ष के डर से रविवार को नगला चंदू में 50 से अधिक जाटव परिवार घरों में ताला डाल कर पलायन कर गए। गांव में अब तक सैंकड़ों जाटव परिवार समेत गांव से बाहर निकल गए हैं। एसएसपी विनोद कुमार मिश्र ने बताया कि फिलहाल दोनों गांवों में पुलिस फोर्स तैनात है।
राया। राष्ट्रीय जाट संरक्षण समिति ने सोमवार को गांव तंबका में सुबह 11 बजे पंचायत बुलाई है। समिति की मांग है कि पीड़ितों को न्याय मिले, दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर फांसी की सजा दी जाए। पीड़ित परिवार के सदस्य को नौकरी एवं मुख्यमंत्री राहत कोष से 51 लाख रुपये सहायता राशि मिले।