मथुरा। मथुरा नगर पालिका के अफसरों ने निगम बनने से चंद दिन पहले ही करोड़ों रुपये के घपले को अंजाम दे दिया। अंतिम बोर्ड बैठक में 19 ऐसे प्रस्तावों को स्वीकृत दर्शा दिया, जो बोर्ड के समक्ष रखे ही नहीं गए थे। इसमें जांचों में फंसा पांच साल पुराना 26 लाख रुपये का एसटीपी भुगतान और 18 करोड़ के वर्क ऑर्डर के कथित बिल भी शामिल हैं।
मथुरा-वृंदावन नगर निगम के सृजन की भनक सभी को पहले ही लग गई थी। इस स्थिति में ईओ ब्रजेश कुमार ने 29 अप्रैल को पालिका बोर्ड की अंतिम बैठक आयोजित की। इसमें 79 प्रस्तावों के सापेक्ष सदस्यों ने 77 को स्वीकृति प्रदान की गई। लेकिन, कमिश्नर को भेजी गई कार्य योजना में चेयरमैन मनीषा गुप्ता और ईओ ब्रजेश कुमार ने 19 प्रस्ताव और शामिल कर दिए।
इन सभी अतिरिक्त 19 प्रस्तावों में उन सभी कामों पर बोर्ड की स्वीकृति दर्शा दी, जो ठेकेदारों के करोड़ों के कथित कार्यों के भुगतान से जुडे़ हुए हैं। इसमें 26 लाख रुपये का पांच साल पुराना एसटीपी संचालन संबंधी ठेकेदार का भुगतान भी शामिल है।
इसके अलावा ईओ वर्तमान सहायक नगर आयुक्त ने अपने एक खास ठेकेदार संदीप अग्रवाल के क ोटेशन वाले 18 करोड़ के कथित कार्यों पर भी इस फर्जीवाडे़ में मुहर लगवा दी है। इनके साथ ही विज्ञापन एजेंसियों से जुडे़ एक करोड़ के और प्रस्ताव भी इसी फर्जीवाडे़ में स्वीकृत दर्शा दिए हैं।
पालिका बोर्ड के सभासद रहे ठाकुर बिहारी लाल की शिकायत पर डीएम ने एडीएम कानून व्यवस्था को जांच के आदेश दिए हैं। एडीएम रमेशचंद्र ने बताया कि शिकायतकर्ता ने इस मामले में साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं, जिनके आधार पर जांच होगी।