मैनपुरी। करहल क्षेत्र के गांव असरोही में प्रधानी की रंजिश में 10 वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी बदले की आग ठंडी नहीं हुई है। अभी तक रंजिश में करीब सात लोग जान गवां चुके हैं। असरोही में वर्ष 2014 में चार हत्याओं के पीछे ग्राम पंचायत मनौना की प्रधानी की रंजिश है। रंजिश की शुरूआत दो लोगों की हत्या से हुई थी। चौहरे हत्याकांड का एक आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सका है।
असरोही की निकटवर्ती ग्राम पंचायत मनौना में करीब 10 साल पूर्व प्रधानी की रंजिश अकबर सिंह यादव और जगन्नाथ सिंह यादव के बीच शुरू हुई थी। प्रधानी के चुनाव में अकबर सिंह यादव हार गया था। तभी से इन दोनों के बीच रंजिश चली आ रही है। रंजिश के चलते जगन्नाथ ने करीब आठ साल पहले अकबर सिंह की हत्या कर दी थी। इसके बाद करीब छह साल पूर्व जगन्नाथ सिंह के भाई जर्मन सिंह ने अकबर सिंह के खास समर्थक रामनरेश यादव की हत्या कर दी थी। जर्मन सिंह और जगन्नाथ सिंह दोनों इन दिनों जेल में हैं। रंजिश में दोनों परिवारों और इनके समर्थकों के बीच 10 साल से लगातार गैंगवार चला आ रहा है। वर्ष 2014 में राकेश यादव उर्फ अब्बा ने अपने साथियों के साथ नीरज और उसके छोटे भाई सोनू यादव की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी।
शराब ठेका के सेल्समैन अखिलेश यादव व उसके साथी सुशील को भी मौत के घाट उतार दिया था। इस बीच राकेश यादव उर्फ अब्बा को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लग रहा था मानों रंजिश अब थम गई है, लेकिन 27 नवंबर 2017 को करहल बघेरा पुल के पास असरोही कांड के आरोपी के भाई दरोगा की गोलियों से भूनकर हत्या की गई। इस हत्याकांड के बाद अभी भी रंजिश की चिंगारी सुलग रही है। पूर्व में कई बार गवाहों पर हमले भी हो चुके हैं। पुलिस की सुरक्षा में उन्हें गवाही पर लाया जाता है। वहीं चौहरे हत्याकांड का एक आरोपी थान सिंह अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।