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कोरोना : बेड पर नहीं चादर, स्टाफ भी नहीं बरत रहा सावधानी

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मैनपुरी। कोरोना के मरीज जिले में लगातार बढ़ रहे हैं। कोरोना को लेकर गाइड लाइन भी जारी हुई है, लेकिन गाइड लाइन का पालन अस्पतालों तक में नहीं हो रहा है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी की बात करें तो यहां मरीजों के लिए चादर तक उपलब्ध नहीं है। दूषित और गंदे गद्दों पर ही बिना चादर के मरीजों को लिटाया जा रहा है। यहां गंभीर और संक्रमित मरीज भी पहुंच रहे हैं। उन्हीं गद्दों पर बिना चादर के मरीजों को लिटाया जा रहा है, जो कोरोना को और रफ्तार दे सकते हैं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी पर यदि ध्यान दें तो बुधवार की रात 20 बेड में से 16 पर चादर नहीं थीं। शुक्रवार की सुबह भी नजारा कुछ ऐसा ही था। इमरजेंसी के 20 बेड में से 14 पर चादर नहीं थी। अस्पताल के बेडों पर बिछाए गए गंदे इतने गंधे हैं कि किसी भी समय इनसे संक्रमण फैल सकता है। वर्तमान में डायरिया और कोरोना के मरीजों का अस्पताल पहुंचना शुरू हो गया है। इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन का इस तरफा कोई ध्यान नहीं है। यहां मौजूद डॉक्टर भी अपनी सुरक्षा पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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जिला अस्पताल का महिला वार्ड
इस वार्ड में 10 बेड हैं, शुक्रवार को 10 में से चार पर चादर थी लेकिन छह पर चादर नहीं थी। इन बेडों पर बिना चादर के ही मरीज भर्ती थे। अधिकतर बेडों के गद्दे इतने गंदे थे कि जिन पर पूर्व में भर्ती रहे मरीजों की बोमटिंग आदि के दाग भी थे।

जिला अस्पताल का पुरुष वार्ड
इस वार्ड की स्थिति और भी खराब थी। यहां 10 बेड में से मात्र दो पर ही चादर थीं आठ बेड पर चादर नहीं थी। बिना चादर के ही यहां बेडों पर मरीज लेटे हुए थे। बेडों के गद्दे इतने गंदे थे कि इन पर लेटना तो दूर बैठना भी उचित नहीं था। मजबूरी में मरीज बिना चादर के ही यहां लेटे हुए थे।
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी
यहां चार बेड और चार टेबल पड़ी हुई हैं। इन पर गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जाता है। यहां एक भी बेड और टेबल जिन पर मरीज भर्ती कराए जाते हैं चादर नहीं था। मरीज भी मजबूरी में यहां भर्ती होते हैं। कुछ मरीजों ने चादर मांगे भी, लेकिन उन्हें स्टॉफ ने उपलब्ध नहीं कराए।
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मरीज बढ़ने के कारण दिक्कत हुई है। अस्पताल के लिए 150 चादर उपलब्ध कराए गए हैं। आगे से सभी मरीजोंं को चादर दिलाया जाएगा।
डॉ. मदनलाल, सीएमएस
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