इन गांवों के लोग परेशान
नदी के दक्षिण दिशा में स्थापित गांव दिबरौली, कुड़ाहार, रामगंज, गांगसी, नगला कुशल, नगला बूंचा, नगला भारा, जिचौली आदि।
सपा सरकार में आयी थी धनराशि
झबराघाट पुल के लिए सपा सरकार में ग्रामीणों ने सात दिन तक आंदोलन किया था। तत्कालीन करहल विधायक सोबरन सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पुल निर्माण की मांग की थी। धनराशि भी स्वीकृति हुई और टेंडर भी जारी किया गया। नापजोख भी कराई गई। इसी बीच सरकार का कार्यकाल खत्म होने से टेंडर निरस्त हो गया और धनराशि भी वापस चली गई।
चंदे से बनाए थे पिलर
अरिंद नदी पर झबराघाट के लिए ग्रामीणों ने 40 साल पहले चंदा करके पिलर बनवाए थे। इसके बाद ग्रामीण इतना चंदा नहीं कर सके कि उस पर लिंटर डलवा लेते। वर्तमान में बिजली के टूटे सीमेंट के खंभों को रखकर वैकल्पिक व्यवस्था कर ली है। इसी से वह नदी को पार करते हैं। अक्सर बाइक सवार हादसे का शिकार हो जाते हैं।
रठेरा के सुखवीर सिंह ने कहा कि झबराघाट पुल का निर्माण न होने से कई गांव के लोगों को रेलवे और गल्ला मंडी आदि में आने-जाने में दिक्कतें हो रही हैं। जीत सिंह ने कहा कि वर्ष 2016 में ग्रामीणों ने सात दिन तक प्रदर्शन किया था। धनराशि स्वीकृत हुई, सत्ता परिवर्तन के कारण निर्माण नहीं हो सका।
एसडीएम सदर नवोदिता शर्मा ने कहा कि पूर्व में तैयार की गई कार्य योजना के संबंध में जानकारी करके पुल निर्माण के लिए प्रयास शुरू किया जाएगा।