कासगंज। सूरपाल उर्फ भोले बाबा का जन्मदिन रविवार को था, लेकिन आश्रम प्रशासन ने जन्मदिन पर कोई आयोजन नहीं किया। पहले भोले बाबा के जन्मदिवस पर पूड़ी खीर बनती थी। वहीं रविवार को आश्रम को सेवादार रोजमर्रा की तरह रोटी सब्जी बनाते नजर आए। भक्त भी आश्रम में पहुंच और वह आश्रम की चौखट पर माथा टेककर वापस लौट गए। पिछले वर्षों में जिस तरह से बाबा के भक्तों की भीड़ जुटती थी वह भीड़ रविवार को नजर नहीं आई। हाथरस के सिकंदराराऊ क्षेत्र में भोले बाबा के सत्संग के दौरान हुए भगदड़ के हादसे में 122 लोगों की मौत हो गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। सत्संग के आयोजन पर एफआईआर भी दर्ज हुई और कई सेवादार गिरफ्तार हुए। इसके बाद से भोले बाबा के आश्रम पर भक्तों का आना जाना कम हुआ है और आयोजन भी बंद हैं, लेकिन जो उनके भक्त हैं वे आज भी बाबा के प्रति अटूट श्रद्धावान हैं और आश्रम में पहुंचकर वे लगातार आश्रम की दहरी पर मत्था टेककर वापस लौट जाते हैं। भोले बाबा के आश्रम में रविवार को जन्मदिन के मौके पर न पूड़ी बनी, न खीर न हलुआ। आश्रम पर न कोई साज सज्जा की गई और न ही कोई संकीर्तन। रोजमर्रा की तरह दाल, रोटी, सब्जी ही सेवादारों के लिए बनी। इस प्रसादी को भोले बाबा के भक्तों ने ग्रहण किया। आश्रम में पहुंचने वाले भक्त केवल माथा टेककर लौट गए। मुख्य सेवादार श्रीकृष्ण ने बताया कि पहले ही कोई आयोजन न होने की बात बताई थी। उन्होंने कहा कि हादसे को लेकर बाबा आहत हैं। जिसके चलते कोई आयोजन नहीं हो रहा।