कासगंज। पटियाली तहसील क्षेत्र के बरौना गांव में लगातार कटान का संकट बना हुआ है। दर्जनभर ग्रामीणों के आवासों तककटान की दस्तक हो चुकी है। आवासीय भूमि का काफी हिस्सा गंगा में कटकर समा चुका है। अब कटान से भयभीत ग्रामीणों ने बिगड़ते हालातों को देखते हुए खुद ही अपना भवन तोड़ना शुरू कर दिया है। सोमवार को एक ग्रामीण ने अपने भवन की दीवारें तोड़कर ईंटें व अन्य जंगला आदि सामान सुरक्षित करने का काम किया। हालांकि कटान की रफ्तार पहले से कम है, लेकिन पूरी तरह से रुकी नहीं है। सिंचाई विभाग लगातार कटानरोधी कार्य मौके पर कर रहा है।5 दिन पूर्व गांव के पूरे हिस्से पर गंगा की रौद्र लहरों ने जमकर कटान शुरू कर दिया। कटान की चपेट में आकर गांव का मंदिर भी गंगा में समा गया। कई ग्रामीणों की झाेपड़ियां, दो ग्रामीणों के शौचालय व कई पेड़ गंगा में कटकर समा गए। सोमवार को भी कई ग्रामीणों के आशियानों पर कटान जारी रहा। करीब 4 मीटर कटान आबादी के इलाके में हुआ। पोखपाल, लालाराम व रामफूल के मकान पर कटान हुआ। कटान की गंभीर स्थिति देखकर पोखपाल ने अपने घर की दीवारें तोड़नी शुरू कर दीं और ईंटे निकाल लीं। पूरे दिन भवन को ढहाने का कार्य होता रहा। पोखपाल ने बताया कि उनके मकान में कई दिन से कटान हो रहा है। कटान की स्थिति से निजात न मिलती देखकर अब अपना मकान खुद तोड़ना शुरू किया है। जिससे ईंट व लोहा आदि को बचाया जा सके। इसी तरह से कटान की स्थिति को देखकर अन्य ग्रामीण चिंतित हैं।
कई परिवारों ने अपने मकानों से सामान हटा दिया है। लगातार गांव में कटान का खतरा बना रहने से ग्रामीण परेशान हैं। वहीं सिंचाई विभाग बरौना गांव में लगातार बल्ली पाइलिंग, परक्यूपाइन स्टड, वायर क्रेट और बंबूक्रेट में ईसी बैग डालकर कटान रोकने के लिए कवायद में जुटा है। इस कवायद का फायदा हुआ कि जो कटान की स्थिति 5 दिन पहले थी वह अब कम हो गई है, लेकिन कटान की स्थिति से निजात नहीं मिल रहा। इसका प्रमुख कारण गंगा के जलस्तर में उतार चढ़ाव होना। जलस्तर बढ़ने के बाद जैसे ही जलस्तर कम होना शुरू होता है वैसे ही कटान की गति बढ़ जाती है। बरौना के ग्रामीण पिछले वर्ष से कटान की आपदा का सामना कर रहे हैं। पहले पश्चिमी क्षेत्र में काफी कटान हुआ था, लेकिन अब यह कटान गांव के पूर्वी हिस्से में हो रहा है।