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Mathura: 1200 अधिवक्ताओं के निष्कासन पर बार एसोसिएशन का बड़ा फैसला, इन पर गिरी गाज

Fri, 12 Aug 2022 12:07 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

 बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश का आदेश जिला जज के माध्यम से बार एसोसिएशन कार्यालय को मिला। निलंबित के साथ ही दोनों को दस वर्ष तक बार काउंसिल के निगरानी में रहने की बात कही गई।
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जिला एवं सत्र न्यायालय मथुरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मथुरा में 1200 अधिवक्ताओं के निष्कासन करने सहित कई मामलों में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत तेहरिया और सचिव सतेंद्र परिहार हो एक वर्ष के लिए निलंबित कर दिया है। बार काउंसिल के आदेश की प्रति जिला जज राजीव भारती के माध्यम से बार एसोसिएशन कार्यालय को रिसीव कराई। 

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बुधवार को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश का आदेश जिला जज के माध्यम से बार एसोसिएशन कार्यालय को मिला। निलंबित के साथ ही दोनों को दस वर्ष तक बार काउंसिल के निगरानी में रहने की बात कही गई। इस पत्र के प्राप्त होते ही बार के अध्यक्ष और सचिव सन्न रह गए। पत्र में कहा गया कि बार एसोसिएशन मथुरा के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित एक शिकायत के आधार पर मामले की बार काउंसिल ऑफ  उत्तर प्रदेश की विशेष समिति ने सुनवाई की है। बार एसोसिएशन मथुरा ने लगभग 1200 अधिवक्ताओं को निष्कासित कर दिया है, जिसका कोई आधार नहीं है। 

2021 में बार एसोसिएशन मथुरा के चुनावों में वोटों की व्यापक हेराफेरी का आरोप भी लगाया गया है। कुल 2527 वोटों में से अध्यक्ष को 2619 वोट और सचिव को 2622 वोट मिले। स्पष्ट है कि प्राप्त हुए इन मतों के आंकड़े कुल डाले गए मतों से अधिक हैं। इस  संबंध बार सचिव सतेंद्र परिहार ने बताया कि उन्हें यह पत्र फर्जी लग रहा है। उनके पास इस प्रकार की कोई सूचना नहीं है। उपाध्यक्ष सर्वेश शर्मा ने बताया कि अध्यक्ष और सचिव के निलंबन की प्रति जिला जज के यहां से उन्हें प्राप्त हुई है। 3 सितंबर तक बार का कार्यकाल है। उसके बाद बार के हितों के अनुकूल कार्य किया जाएगा। 
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बता दें इन मुद्दों को लेकर बार के पूर्व सचिव राज कुमार उपाध्याय ने तीन दिन तक आमरण अनशन भी किया। उन्हें आश्वासन तो दिया लेकिन नियमित प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को अभी तक वापस नहीं लिया है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता सिद्धार्थ चतुर्वेदी संस्थापक संरक्षक अधिवक्ता जागरूक मंच ने बताया कि उन्होंने नवंबर 2021 में शिकायत की थी। बार काउंसिल चेयरमैन को उन्होंने सैकड़ों अधिवक्ताओें के हस्ताक्षर युक्त शिकायती पत्र दिया था। मेरी शिकायत की जानकारी लगने पर मुझे दबाव में लेने का प्रयास भी किया। 

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