शस्त्र लाइसेंस बनवाने में मानसिक रूप से स्वस्थ होने का प्रमाणपत्र मांगा जाता है। जिले में मानसिक रोग का चिकित्सक न होने पर उसे अलीगढ़ भेज दिया जाता है। वहां से आवेदक को आगरा के मानसिक अस्पताल में भेजा जा रहा है। यहां 15 दिन भर्ती होने के बाद मानसिक प्रमाणपत्र बनाया जाएगा। इसके लिए उसे शुल्क के रूप में पांच हजार रुपये भी खर्च करने पड़ेंगे।
एसीएमओ डॉ. राम मोहन तिवारी ने बताया कि शस्त्र लाइसेंस के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवेदक का प्रमाणपत्र मांगा जाता है। जिले में आंखों सहित अन्य जांचें तो हो जाती हैं, लेकिन यहां मानसिक रोग चिकित्सक नहीं है। अभी तक अलीगढ़ में रिपोर्ट बन रहीं थीं, लेकिन अब वहां से आवेदक को आगरा के मानसिक रोग अस्पताल में भेजा जा रहा है। वहां शस्त्र लाइसेंस आवेदक को 15 दिन भर्ती होने की बात कही जा रही है। इसका खर्चा पांच हजार रुपये बताया जा रहा है। 15 दिन रुकने के बाद वहां आवेदक मानसिक रोग से स्वस्थ हैं या नहीं, इसकी रिपोर्ट लगाई जाएगी।
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एक दिन में चार से पांच आते हैं आवेदक
एसीएमओ ने बताया कि उनके पास शस्त्र आवेदक एक दिन में चार से पांच आते हैं। सभी को अलीगढ़ भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि आगरा मानसिक अस्पताल गए कुछ आवेदकों ने मामले की जानकारी दी है। इस संबंध में जानकारी की जा रही है।