निकाय चुनाव की रणभेरी बज चुकी है, सेनाएं भी सियासी मैदान में दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हैं। लेकिन सेनापति का अब भी इंतजार है। अब तक प्रमुख दलों ने सियासत के मैदान में अपने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं। ऐसे में सियासत का ये संग्राम अधूरा है। हालांकि सभी दल जल्द ही सेनापति के नाम की घोषणा करने का दावा कर रहे हैं।
नौ अप्रैल को राज्य निर्वाचन आयोग ने निकाय चुनाव की घोषणा कर दी थी। इसके बाद 11 अप्रैल से नामांकन प्रक्रिया चल रही है। जिले के दस नगर निकाय अध्यक्षों के लिए पहले ही दिन से जोर आजमाइश चल रही है। प्रमुख दलों के कार्यकर्ता भी उत्साह से भरे हुए हैं। लेकिन अब तक प्रमुख दलों में से किसी ने भी प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की है। इसके चलते समर्थक खुलकर लोगों से अपील भी नहीं कर पा रहे हैं। वहीं दावेदारों ने भी अपनी पूरी तैयारी कर रखी है, लेकिन उन्हें भी बस टिकट के रूप के हरी झंडी मिलने का इंतजार है। जनता भी दलों की तरफ ही देख रही, क्योंकि लोग जानना चाहते हैं कि आखिर पार्टी इस बार किसे टिकट देगी और वह जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरेगा।
वहीं दूसरी तरफ अब नामांकन के लिए भी केवल दो दिन का ही समय बचा है। ऐसे में राजनैतिक दलों के पास भी बहुत अल्प समय बचा है। सूत्रों के अनुसार राजनैतिक दल इस इंतजार में हैं कि पहले उनके प्रतिद्वंद्वी दल प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दें, ताकि उसके मुकाबले में बेहतर प्रत्याशी उतारा जा सके।
जिलाध्यक्ष बोले जल्द साफ होगी तस्वीर
एक ओर जहां प्रत्याशियों और दावेदारों को टिकट की घोषणा होने का इंतजार है, वहीं राजनैतिक दलों के पदाधिकारी जल्द से जल्द तस्वीर साफ होने की बात कह रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप चौहान ने बताया कि हाईकमान कभी भी प्रत्याशी के नाम की सूची जारी कर सकता है। वहीं सपा जिलाध्यक्ष आलोक शाक्य का कहना है कि जल्द ही शीर्ष नेतृत्व द्वारा प्रत्याशियों के लिए टिकट की घोषणा कर दी जाएगी।
असमंजस में हैं दावेेदार
दावेदारों के लिए हर गुजरता दिन भारी बीत रहा है। दरअसल उनके सामने इस बात का संकट है कि अगर टिकट उन्हें नहीं मिली तो उन्हें बैकफुट पर आना पड़ेगा। वहीं कई दावेदारों ने तो अब बागी होने का भी मन बना लिया है। सूत्रों के अनुसार अगर पार्टी उन्हें टिकट नहीं देते है तो वे निर्दलीय ही मैदान में उतरेंगे। इससे पार्टियों का भी गणित बिगड़ सकता है।