जिले के घिरोर क्षेत्र में एतिहासिक धरोहर खोज रही राज्य पुरातत्व विभाग की टीम को सोमवार को फिर एक बार सफलता मिली। इस बार टीम ने गांव कल्होर पछां स्थित टीले का सर्वे किया। टीले पर बने मंदिर में टीम को 10वीं सदी की मूर्तियां और वास्तुखंडों के अवशेष मिले। टीम ने मंदिर और अवशेषों के बारे में भी लोगों से जानकारी जुटाई।
तहसील घिरोर में राज्य पुरातत्व विभाग की टीम लगभग एक पखवाड़े से सर्वे कर रही है। सर्वेक्षण टीम गांव-गांव जाकर एतिहासिक स्थल, टीलों और मंदिरों में सर्वे कर रही है। अब तक कई प्राचीन मूर्तियां और स्थल टीम को मिल चुके हैं। लेकिन बीते एक सप्ताह से टीम को कुछ भी खास हाथ नहीं लग पा रहा था।
सोमवार को सर्वे करने निकली टीम कल्होर पछां स्थित टीले पर पहुंचीं। यहां टीले के आसपास निरीक्षण के बाद टीम टीले के ऊपर बने मंदिर पर पहुंची। मंदिर पर रखी मूर्तियां और वास्तुखंडों क अवशेष देखकर टीम चौंक गई। क्षेत्रीय अधिकारी राजीव कुमार त्रिवेदी ने बताया कि मंदिर पर रखीं प्रतिमाएं और वास्तुखंड 10वीं सादी यानी मध्यकालीन युग के हैं। मूर्तियों में महिला पुरुष सभी की आकृतियां उकेरी गई हैं। टीम ने यहां से मंदिर, मूर्तियां और अवशेषों के फोटो रिसर्च के लिए संकलित किए।
टीम ने ग्रामीणों से भी टीले के बारे में जानकारी जुटाई। ग्रामीणों ने बताए कि ये टीला उनके बाप-दादा के जमाने से है। ग्रामीण किंवदंतियों के अनुसार श्राप के कारण एक बरात पत्थर की हो गई थी, जिसके अवशेष ही मूर्तियों के रूप में टीले पर उपलब्ध हैं।
दरवाह और विधूना में भी मिली ऐतिहासिक विरासत
राज्य पुरातत्व विभाग की टीम कल्होर पछां के बाद विधूना पहुंची। यहां टीम को प्राचीन गुंबदकार मंदिर मिला। इसमें ग्रेनाइट की प्रतिमाएं लगी हुई हैं। यहां भी मंदिर के वास्तुखंड रखे हुए मिले और पास ही एक टीला भी स्थित है। इसके अलावा दरवाह में एक टीला और शिव मंदिर व जवापुर में बाल्मीकि आश्रम का भी टीम ने सर्वे किया। हालांकि इन अवशेषों से स्पष्ट जानकारी नहीं हो सकी।
कनेगी में मिली थीं प्राचीन मूर्तियां
सर्वे के शुरुआत में ही राज्य पुरातत्व विभाग की टीम को कनेगी में भी प्राचीन मूर्तियां हाथ लगी थीं। यहां गांव के बाहर स्थित एक मंदिर पर रखी मूर्तियां के अवशेष भी लगभग 10वीं सदी के होने का ही अनुमान लगाया गया था। इसके बाद फैजपुर के गांव नगरिया में भी एक तीन सौ साल पुराना शिव मंदिर मिला था।