फर्जी वसीयत बनाने के मामले में नहीं मिली अग्रिम जमानत
जेठ के खिलाफ महिला ने लिखाई थी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। पिता के नाम के मकान की फर्जी वसीयत बनाने के आरोपी की अग्रिम जमानत अपर जिला जज प्रथम मुनव्वर जहां ने खारिज कर दी है। छोटे भाई की पत्नी ने जेठ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। न्यायालय से चल रहे वारंट के बाद पुलिस का दबाव बढ़ने पर उसने आवेदन किया था।
थाना कोतवाली के मोहल्ला सराउग्यान निवासी शिवपाल सिंह कलेक्ट्रेट में नौकरी करते थे। उनके पुत्र कुलोत्तम की शादी 12 मई 1989 को किरन के साथ हुई थी। शादी के तीन महीने बाद कुलोत्तम की हत्या कर दी गई। 20 अक्तूबर 1981 को शिवपाल सिंह, उनके पुत्र कुलभूषण तथा दिनेश सिंह की हत्या कर दी गई। पति की मौत के बाद किरन तथा उसके जेठ कुलकर्ण सिंह ससुर के नाम वाले मकान में ही रहने लगे।
इसके बाद कुलकर्ण ने 11 जून 1980 को नोटेरी से प्रमाणित वसीयत बनवा ली। इसी वसीयत के आधार पर उसने किरन को घर से निकालने की कोशिश की। किरन ने अपने जेठ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। जेठ ने उच्च न्यायालय की शरण ली। दूसरी ओर किरन की रिपोर्ट के बाद न्यायालय से कुलकर्ण के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए गए। पुलिस का दबाव बढ़ने पर कुलकर्ण ने अग्रिम जमानत पाने के लिए आवेदन किया।
अग्रिम जमानत की सुनवाई अपर जिला जज प्रथम मुनव्वर जहां के न्यायालय में हुई। कुलकर्ण के वकील ने उम्र का हवाला देकर जमानत देने की मांग की। एडीजीसी विपिन कुमार चतुर्वेदी तथा पुष्पेंद्र दुबे ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने का विरोध किया। अपर जिला जज ने जेठ कुलकर्ण की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है।