शबनम का डेथ वारंट फिलहाल टल गया है। इसके टलने से मथुरा जेल अधिकारियों ने फिलहाल राहत की सांस ली है। जिला जज अमरोहा के डीजीसी महावीर सिंह ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट मंगलवार को जिला जज को सौंपी है। इस रिपोर्ट में उन्होंने शबनम की दूसरी दया याचिका की जानकारी जिला जज को दी है। बताया कि है कि यह दया याचिका अभी लंबित है। डीजीसी (जिला शासकीय अधिवक्ता) ने बताया कि इस दया याचिका के लंबित रहते हुए डेथ वांरट की प्रक्रिया प्रारम्भ नहीं हो सकती। यह दया याचिका दिल्ली के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के अधिवक्ताओं ने तैयार की है।
अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र के गांव बावनखेड़ी के शिक्षक शौकत अली की इकलौती बेटी शबनम पर अपने ही परिवार के सात लोगों की जघन्य हत्या करने का आरोप है। जिसे लेकर जिला जज अमरोहा ने सजा-ए-मौत का निर्णय दिया था। इसी निर्णय को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अलावा यहां तक कि राष्ट्रपति भी दया याचिका को अस्वीकार कर चुके हैं। डेथ वारंट की प्रक्रिया जिला जज की अदालत में शुरू हो इससे पहले उसकी और से पैरवी करते हुए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के अधिवक्ताओं ने एक और दया याचिका राष्ट्रपति के नाम तैयार की है। जिसमें उन्होंने मौत की सजा पर पुन:विचार करने की प्रार्थना की है।
अमरोहा में शबनम के वकील रहे अरशद अंसारी ने बताया कि यह दया याचिका अधिवक्ता श्रेया रस्तोगी ने दी है। इस दया याचिका की एक प्रति उनके द्वारा रामपुर जेल जहां पर शबनम बंद है, वहां पर दी है। इसकी प्रति जिला जज अमरोहा को भी दी है। जिला जज द्वारा शबनम के डेथ वारंट की प्रक्रिया प्रारम्भ करने से पहले 23 फरवरी को रिपोर्ट मांगी थी। मंगलवार को डीजीसी द्वारा अपनी रिपोर्ट जिला जज अमरोहा का सौंप दी है। उन्होंने बताया कि फिलहाल शबनम का डेथ वांरट टल गया है। जब तक इस दया याचिका पर सुनवाई नहीं हो जाती है, डेथ वारंट की प्रक्रिया शुरू नहीं होगी।
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सलीम की दया याचिका भी बनेगी आधार
शबनम सैफी और सलीम पठान की सजा की फाइल एक साथ आगे बढ़ी है। कोर्ट ने एक साथ दोनों को फांसी की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी दोनों की फाइल एक साथ थीं। राष्ट्रपति ने एक साथ दोनों की दया याचिका खारिज की परंतु सुप्रीम कोर्ट में शबनम की पुनर्विचार याचिका खारिज हो गयी पर सलीम की याचिका अभी भी विचाराधीन है। अधिवक्ता अरशद अंसारी ने बताया कि शबनम के डेथ वारंट के टलने का यह आधार भी हो सकता है।