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सैलून के कारोबार पर लॉक डाउन की कैंची----फ़ोटो ट्रैक पर

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--एक करोड़ रुपये तक का हो चुका नुकसान अमर उजाला ब्यूरो आगरा। लॉकडाउन ने सैलून के कारोबार पर कैंची चला दी है। रोजाना की दुकानदारी तो गयी, सहालग के सीजन से भी हाथ धो बैठे हैं। इधर, 70 दिन से ज्यादा समय तक धंधा चौपट रहने के कारण बचत भी खत्म होने को आई है। वहीं, अन्य शहरों की तरह यहां भी काम शुरू किए जाने की मांग होने लगी है। शहर में औसतन एक हजार छोटे बड़े सैलून हैं। जिनमें अधिकतर रोज कमाने और खाने वाले हैं। ऐसे में इतने दिनों तक कारोबार का बंद रहना संकट भरा है। इसके अलावा इसमें काम करने वाले कर्मचारी तनख्वाह के अलावा कमीशन पर भी काम करते हैं। इस तालाबन्दी के कारण बेरोजगार हो गए। इधर, सहालग के सीजन निकलने से तमाम बुकिंग भी निरस्त हो गयी। काम के दौरान बचाया हुआ पैसा भी खत्म होने की कगार पर है। ---- टॉक: इस लॉकडाउन में काम चौपट हो गया है। बिजली, टेलीफोन के बिल जैसे खर्चों में कोई कमी नहीं आयी। गुरुग्राम, नोएडा जैसे शहरों की तरह काम शुरू हो जाना चाहिए। दौलत परमार, सैलून संचालक। ----- सैलून में काम करने वाले कर्मचारी बेरोजगार हो गए। जो बचत की थी, वो भी खत्म होने को है। सहालग का सीजन भी हाथ से चला गया। वकार एहमद, संचालक। ----- हम रोज कमाने और रोज खाने वालों की श्रेणी में आते हैं। इतने दिन की बंदी ने हालात खारा कर दी है। आगे भी चुनौतियां कम नहीं होने वाली। इस्लाम नबी। संचालक। ----- हम पहले से ही स्वच्छता का ख्याल रखते हैं। आगे भी सरकारी नियम के हिसाब से चलने को तैयार हैं। जैसे अन्य शहरों में सैलून में काम हो रहा है। शादाब, संचालक।
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