शोध छात्रा हत्याकांड के आरोपी को आठ साल बाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। इस मामले में सीबीआई ने विवेचना की थी, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। चार्जशीट लगने पर 12 मई 2016 को उदय स्वरूप दूसरी बार जेल गया था।
आगरा के बहुचर्चित दयालबाग स्थित शिक्षण संस्थान में 15 मार्च 2013 को हुए शोध छात्रा हत्याकांड के आरोपी उदय स्वरूप को एक बार फिर हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। वह 8 साल से जेल में निरुद्ध है। हत्याकांड की विवेचना स्थानीय पुलिस के बाद सीबीआई ने की थी। विवेचना में दुष्कर्म की पुष्टि होने पर 12 मई 2016 को आरोपी को दोबारा जेल भेजा गया था।
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उदय स्वरूप की ओर से हाईकोर्ट में पैरवी करने वाले अधिवक्ता दीपक शर्मा ने बताया कि उदय स्वरूप को सशर्त जमानत मिली है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सुनवाई के दौरान अभियुक्त कोर्ट की कार्रवाई में सहयोग करेगा। किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा। सुनवाई समाप्त होने तक देश छोड़कर नहीं जाएगा। हाईकोर्ट से जमानत मंजूर होने पर आदेश की प्रतिलिपि दाखिल कर जमानत भरवाई जाएगी।
प्रदर्शन कर छात्र-छात्राओं ने मांगा था न्याय
15 मार्च 2013 को दयालबाग स्थित शिक्षण संस्थान की नैनो बायोटेक्नोलॉजी लैब में हत्याकांड हुआ था। शोध छात्रा की लैब में दुष्कर्म के बाद बेरहमी से हत्या की गई थी। उसे कटर से काटकर मारा गया था। कार संस्थान के बाहर लावारिस खड़ी मिली थी। पुलिस ने लैब के अंदर से शव बरामद किया था। घटना के बाद छात्र-छात्राएं आक्रोशित हो गए थे। सड़क पर प्रदर्शन किया था। सोशल मीडिया पर न्याय के लिए मुहिम छेड़ी गई थी। पुलिस ने आरोपी उदय स्वरूप और लैब टेक्नीशियन यशवीर संधू को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस ने हत्या, दुष्कर्म का प्रयास और साक्ष्य मिटाने की धारा में आरोप पत्र दाखिल किया था। तब आरोपी को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।
मगर, प्रदेश सरकार ने केस सीबीआई ट्रांसफर कर दिया था। सीबीआई की विवेचना में यशवीर संधू को क्लीन चिट दी गई थी। उदय स्वरूप को मुख्य आरोपी बनाते हुए केस में चार्जशीट लगाई थी। दुष्कर्म की धारा की वृद्धि की थी। इस पर आरोपी उदय स्वरूप को दोबारा गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। वह तभी से जेल में निरुद्ध है।
सीबीआई को डीएनए रिपोर्ट से मिला था साक्ष्य
शिक्षण संस्थान में आरोपी उदय स्वरूप के परिवार का काफी प्रभाव था। उसके नाना पूर्व आईएएस अधिकारी थे। दयालबाग स्थित शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष भी थे। घटना के बाद पुलिस ने कई दिन तक संस्थान में डेरा डाला था। एक-एक करके साक्ष्य जुटाए थे। आरोपी साक्ष्य नष्ट करने में लगा था। आरोपी के प्रभाव के चलते छात्र-छात्राएं भी खुलकर सामने नहीं आ पाए थे। यही वजह थी कि सीबीआई के हाथ कोई चश्मदीद नहीं लगा था। परिस्थितिजन्य साक्ष्य और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया था। मुकदमा अपर जिला जज प्रथम के न्यायालय में विचाराधीन है। शुक्रवार को सुनवाई होनी है। इस मामले में 50 लोगों की गवाही पूरी हो चुकी है। अब सफाई साक्ष्य में चल रहा है।
पिता बोले, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
मृतक छात्रा के पिता ने बताया कि वह 11 साल से न्याय के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें इंसाफ नहीं मिल सका है। केस में 50 से अधिक गवाही हो चुकी है। हाईकोर्ट से जमानत मिलने की जानकारी है। अब जमानत के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।
कब क्या हुआ
- 15 मार्च 2013 : दयालबाग स्थित शिक्षण संस्थान में शोध छात्रा की हत्या।
- 16 मार्च 2013 : घटना की जानकारी पर छात्र-छत्राएं सड़क पर प्रदर्शन करने लगे।
- 17 मार्च 2013 : पुलिस ने संस्थान की लैब के पास से लैपटॉप बरामद किया।
- 22 अप्रैल 2013 : हत्याकांड में उदय स्वरूप और यशवीर संधू जेल भेजे गए।
- 18 जुलाई 2013: पुलिस ने विवेचना पूरी की। आरोप पत्र को कोर्ट में पेश किया।
- 22 जुलाई 2013: प्रदेश सरकार ने केस सीबीआई को स्थानांतरित किया।
- 10 फरवरी 2014 : उदय स्वरूप और यशवीर संधू को हाईकोर्ट से जमानत मिली।
- 5 जनवरी 2016 : सीबीआई ने कोर्ट में आरोपपत्र प्रस्तुत किया। दुष्कर्म के प्रयास की धारा को हटाया गया।
- आरोपपत्र दुष्कर्म, हत्या और साक्ष्य मिटाने में लगाया गया। इसमें उदय स्वरूप पर आरोप तय किए गए। यशवीर संधू को क्लीन चिट दी गई।
- 12 मई 2016 को आरोपी उदय स्वरूप को फिर से जेल भेजा गया था।