आगरा। व्यापारी भाइयों को अवैध रूप से हिरासत में लेकर किनारी बाजार में 5 करोड़ की दुकान का बैनामा कराने के मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर शाहगंज जितेंद्र कुमार दोषी पाए गए हैं। एसीपी ने जांच के बाद डीसीपी को रिपोर्ट दी थी। इसमें प्रतिकूल प्रविष्टि देने की संस्तुति की गई है।
पुरानी विजय नगर कालोनी निवासी मोहनलाल अग्रवाल, उनके भाई सोहनलाल आदि के विरुद्ध शाहगंज थाने में न्यायिक आदेश पर धोखाधड़ी का अभियोग दर्ज किया गया था। कारोबारी भाइयों पर बाजार की देनदारी काफी हो गई थी। उन्होंने अपने रिश्तेदारों से भी कर्ज ले रखा था। इसी मामले में 20 जून की शाम को शाहगंज पुलिस ने चित्तीखाने में दबिश देकर सोहनलाल उनके पुत्र दिलीप और भतीजे शिवम को उठा लिया। भाइयों ने आरोप लगाया था कि तीनों को 22 जून की शाम तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। दबाव बनाकर 22 जून को उनकी एक दुकान का शुभम गोयल के नाम बैनामा करा दिया। तत्कालीन पुलिस आयुक्त डाॅ. प्रीतिंदर सिंह ने प्रभारी निरीक्षक शाहगंज जितेंद्र सिंह को लाइन हाजिर किया था। एसीपी यातायात सैयद अरीब अहमद को जांच सौंपी गई थी। व्यापारी भाइयों को अवैध हिरासत में रखने के साक्ष्य के लिए थाने में लगे सीसीटीवी देखे गए तो वह खराब मिले थे।
डीसीपी सिटी सूरज राय ने बताया कि जांच में तत्कालीन इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह को दोषी पाया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर इंस्पेक्टर को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
दोबारा जांच में खुली पोल
आगरा। पुलिस के फंसने पर इस मामले में दबाव बनाकर दोनों पक्षों में समझौता करा दिया गया था। चार माह बाद व्यापारी भाइयों ने अधिकारियों के सामने पेश होकर कहा था कि उनसे दबाव में समझौता करवाया गया है। इस पर दोबारा फाइल खोली गई थी।