आगरा। जगदीशपुरा के बोदला में 10 हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जे की साजिश की परतें खुलने के बाद भी सभी आरोपियों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है। एसआईटी की जांच कछुआ चाल से चल रही है। जमीन कब्जाने की साजिश के सूत्रधार का पता दो माह बाद भी नहीं चल सका है। बिल्डर, होटल और रेस्टोरेंट के संचालकों की भूमिका का भी खुलासा नहीं हो सका। जमीन के मालिकाना हक की जांच भी पूरी नहीं हो सकी है। बोदला में बैनारा फैक्टरी के सामने भूखंड पर रहने वाले चौकीदार रवि कुशवाह, उसके भाई शंकरिया को गांजा तस्करी के आरोप में फर्जी मुकदमा दर्ज करके जेल भेजा गया। इसके बाद पत्नी और बहन को अवैध शराब बेचने के आरोप में जेल भेज दिया गया था। रातों रात बेशकीमती जमीन पर कब्जा कर लिया गया। मामला तत्कालीन डीजीपी के पास पहुंचा था। इसके बाद टहल सिंह की पुत्रवधू होने का दावा करने वाली उमा देवी ने जमीन पर कब्जे का मुकदमा थाना जगदीशपुरा में दर्ज कराया था। तत्कालीन कमिश्नर ने एसआईटी गठित करके जांच करवाई तो एसओ जगदीशपुरा रहे जितेंद्र सिंह पर फर्जी मुकदमे दर्ज करके चौकीदार और उसके परिवार को जेल भेजे जाने की बात साफ हुई। जितेंद्र सिंह, जमीन कब्जाने में शामिल रहे अमित अग्रवाल और पुरुषोत्तम पहलवान को जेल भेजा गया था। तीनों अब भी जेल में हैं, लेकिन साजिशकर्ता बिल्डर कमल चौधरी और उसके बेटे को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे मिल गया। इसके बाद एसआईटी की जांच में किशोर बघेल का नाम प्रकाश में आया। सदर के रेस्टोरेंट संचालक, मंटोला के होटल संचालक के नाम भी प्रकाश में आए थे। दोनों से पूछताछ की रस्म अदायगी की गई। हाईकोर्ट ने बिल्डर को इस शर्त पर गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी कि वह पुलिस को जांच में सहयोग करेगा, लेकिन उससे केवल एक बार ही पूछताछ हो सकी। अब फर्जी मुकदमे में जेल जाने वाला चौकीदार परिवार अपने को ठगा महसूस कर रहा है। उसे अभी तक न्याय नहीं मिल सका।
कब्जे का आरोपी किशोर बघेल पहुंचा थाने
आगरा। बोदला जमीन कांड में पुरुषोत्तम पहलवान के साथ कब्जे की साजिश में शामिल रहे किशोर बघेल का नाम मुकदमे में बढ़ाया गया था। पुलिस उसकी गिरफ्तारी नहीं कर सकी थी। मंगलवार को वह गिरफ्तारी पर स्टे लेकर थाने पहुंच गया। पुलिस अब उसे पूछताछ के लिए बुलाएगी। प्रकाश में आया था कि कब्जे के बाद सामान को वह ट्रक में उठाकर ले गया था।
इन सवालों के जवाब अभी बाकी
- दो माह बाद भी पुलिस व प्रशासन की जांच में यह साफ नहीं हो सका कि जमीन पर वर्तमान में मालिकाना हक किसका है।
- फर्जी मुकदमे दर्ज कराने के मामले में केवल एसओ पर कार्रवाई की गई। दोनों मुकदमों के विवेचकों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। एक मुकदमे में केवल 22 दिन में चार्जशीट लगाई गई थी।
- मुकदमे में फर्जी बैनामे कराने वाले मनोज यादव और अन्य के खिलाफ क्या जांच हुई।
- मुकदमे की वादिनी को अभी तक पूछताछ के लिए क्यों नहीं बुलाया गया।
- एसआईटी ने जांच में प्रकाश में आए आरोपियों से पूछताछ क्यों नहीं की।