आगरा में मेट्रो: मेट्रो के लिए होता कार्य
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राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण से अनापत्तियां नहीं मिलने के कारण छह महीने से ताजमहल, आगरा किला और जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन की टेंडर प्रक्रिया अधर में लटकी है। प्राथमिकता कॉरिडोर में छह स्टेशन हैं। इनमें सिर्फ तीन का निर्माण शुरू हो सका है।
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास पर मेट्रो प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक में संरक्षित स्मारकों से अनापत्तियां दिलाए जाने की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने जल्द अनापत्तियां प्राप्त करने का आश्वासन दिया।
सात दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब आठ हजार करोड़ रुपये की आगरा मेट्रो परियोजना का शिलान्यास किया था। सबसे पहले छह स्टेशनों का प्राथमिकता कॉरिडोर बनना है। 2024 तक छह स्टेशनों के बीच मेट्रो ट्रायल शुरू करने की योजना है। परंतु शिलान्यास के छह महीने बाद भी ताजमहल, आगरा किला और जामा मस्जिद भूमिगत मेट्रो स्टेशन के टेंडर नहीं खुले।
तीनों भूमिगत स्टेशन संरक्षित स्मारकों की प्रतिबंधित परिधि के पास से बनेंगे। इनके लिए सुरंग खोदी जाएगी। इससे पहले यूपीएमआरसी को राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण से अनापत्तियां चाहिए। सिकंदरा से ताजपूर्वी गेट तक 14 किमी लंबे पहले कॉरिडोर में 13 स्टेशन का निर्माण होना है। फिलहाल प्राथमिकता कॉरिडोर में शामिल छह स्टेशनों से सिर्फ तीन एलिवेटिड स्टेशन का सिविल कार्य शुरू हो सका है।
मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखी है। समय पर कार्य पूरा करने के लिए नेशनल मॉन्युमेंट आथॉरिटी से क्लीयरेंस चाहिए। उन्होंने जल्द इसे प्राप्त करने का आश्वासन दिया है।
कुमार केशव, प्रबंध निदेशक, यूपीएमआरसी
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