जनसूचना अधिकार (आरटीआई) एक्ट लागू हुए 17 साल बीत गए। लेकिन, जनसूचनाएं देने में सबसे ज्यादा लापरवाह आगरा के अधिकारी हैं। राज्य सूचना आयोग की रिपोर्ट यही कह रही है। पिछले पांच महीने में मंडल के 68 जनसूचनाधिकारियों पर आयोग ने 17 लाख रुपये जुर्माना लगाया। इनमें आगरा के सबसे ज्यादा 31 अधिकारी हैं। वहीं मैनपुरी के सबसे कम सात अधिकारियों पर जुर्माना लगा है।
मंडल में आगरा की स्थिति सबसे खराब
राज्य सूचना आयोग की जारी रिपोर्ट में मंडल में सबसे खराब स्थिति आगरा की है। यहां मंडलायुक्त, एडीएम सिटी, एसडीएम, तहसीलदार व मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय के जनसूचनाधिकारियों पर आरटीआई में सूचना नहीं देने पर 25-25 हजार रुपये जुर्माना लग चुका है। दूसरे नंबर पर फिरोजाबाद और तीसरे स्थान पर मथुरा के जनसूचनाधिकारी हैं। चौथे नंबर पर मैनपुरी है, जहां सात जनसूचनाधिकारियों पर जुर्माना लगा है।
इनमें सबसे बदतर हालत ग्राम विकास, पंचायतीराज और शिक्षा विभाग की है। ग्राम्य विकास विभाग में 12, पंचायतीराज में 10, माध्यमिक व बेसिक शिक्षा में 10, राजस्व में आठ समेत कुल 13 विभागों के 68 अधिकारी शामिल हैं। यह आंकड़े 12 फरवरी से 25 जुलाई तक के हैं। इन अधिकारियों ने न तो आरटीआई में सूचनाएं उपलब्ध कराई, न अपील के बाद आयोग के समक्ष प्रस्तुत हुए।