आगरा में बिजली कंपनियों की सेवा से 51 फीसदी उपभोक्ता असंतुष्ट हैं। नकारात्मक फीडबैक हैं। फिर यह कैसी उपभोक्ता सेवा। ये सवाल उपभोक्ता हेल्पलाइन 1912 के आंकड़ों के आधार पर बुधवार को विद्युत नियामक आयोग की जनसुनवाई में उपभोक्ता परिषद ने उठाए हैं। दूसरे दिन भी उपभोक्ताओं ने स्लैब परिवर्तन प्रस्ताव को खारिज करने और विद्युत दरों में कमी की मांग उठाई है।
वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से दूसरे दिन भी हुई सार्वजनिक जनसुनवाई
वित्त वर्ष 2022-23 के लिए विद्युत दरों, वर्ष 2021-22 के लिए वार्षिक प्रगति समीक्षा और वर्ष 2020-21 के लिए ट्रू़ अप पिटीशन पर विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष राज प्रताप सिंह की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से दूसरे दिन भी सार्वजनिक जनसुनवाई हुई। जनसुनवाई में पॉवर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक, मध्यांचल व पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम, उपभोक्ता व उपभोक्ता संगठनों से रायशुमारी की। पॉवर कॉरपोरेशन ने आयोग के समक्ष एक बार फिर स्लैब परिवर्तन पर प्रस्तुतिकरण देना चाहा, जिसे आयोग के अध्यक्ष ने रोक दिया। रिबेम्प योजना को एआरआर में शामिल करने पर भी आपत्ति जताते हुए इसकी डीपीआर अलग से आयोग में लाने के लिए कहा।
उपभोक्ताओं ने दिया है नकारात्मक फीडबैक
उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के सामने उपभोक्ता सेवा हेल्पलाइन 1912 के आंकड़े रखते हुए कहा कि 51 फीसदी उपभोक्ताओं ने नकारात्मक फीडबैक दिया है। फिर बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं को कैसी सेवा दे रही हैं। उन्होंने कहा जब बिजली कंपनियों ने 500-500 करोड़ रुपये की कंसल्टेंट कंपनियां रखी हैं फिर नफा-नुकसान के आंकड़े गलत कैसे हो सकते हैं। उपभोक्ता हित में उन्होंने बिजली कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोलने की बात कही। जनसुनवाई में उपभोक्ता संगठनों से जुड़े प्रत्युष खंडेलवाल, गौरव नंद, उत्तर प्रदेश उद्योग के सतीश चंद माहेश्वरी, भारत शर्मा, सुभम मोदी आदि ने अपने सुझाव दिए हैं।