कासगंज। महिला अधिवक्ता मोहिनी तोमर हत्याकांड में पति की तहरीर पर छह आरोपियों के खिलाफ कोतवाली में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। इनमें पांच अधिवक्ता और एक एलएलबी का छात्र शामिल हैं। नामजद आरोपियों में एक अधिवक्ता कासगंज में वर्ष 2018 में हुए दंगे का भी आरोपी है। मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस की आठ टीमें पूरे घटनाक्रम की जांच में जुट गई हैं। वहीं, मामले में पति की ओर नामजद किए गए आरोपियों में से पांच आरोपियों के अधिवक्ता होने पर बार एसोसिएशन ने विरोध जताया। शुक्रवार को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को पत्र लिखकर मुकदमे को संदिग्ध बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की। इस दौरान अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। अधिवक्ता मोहिनी तोमर 3 सितंबर को दोपहर के समय जिला न्यायालय के गेट से लापता हो गई थीं। इसके बाद 4 सितंबर की शाम करीब छह बजे रेखपुर माइनर में गांव रजपुरा के निकट उनका अर्द्धनग्न अवस्था में शव मिला था। पति बृजतेंद्र तोमर और मृतका की बहन रजनी ने अधिवक्ता मोहिनी के शव की शिनाख्त की थी। बृहस्पतिवार को तड़के चार बजे शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद कछला घाट पर शव का अंतिम संस्कार किया गया। बृहस्पतिवार को दोपहर में अधिवक्ताओं ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए दो घंटे तक मथुरा-बरेली हाईवे को जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया था। इस बीच पुलिस देर शाम तक पति की ओर से तहरीर मिलने का इंतजार करती रही। देर रात पति बृजतेंद्र तोमर ने कोतवाली पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ हत्या की तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर छह आरोपियों मुस्तफा कामिल एडवोकेट, असद मुस्तफा, हैदर मुस्तफा और सलमान पुत्रगण मुस्तफा कामिल निवासी सोंरोंजी कासगंज, केशव मिश्रा निवासी सोंरोंजी, कासगंज व मुनाजिर रफी एडवोकेट निवासी बड्डूनगर कोतवाली कासगंज के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।