मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर का गुरुवार को तबादला प्रमुख सचिव कृषि के पद पर कर दिया गया है। माना जा रहा है कि उन्हें मथुरा के जवाहर बाग प्रकरण में हटाया गया है। वजह यह है कि उनके कार्यकाल में ही रामवृक्ष और उसके साथियों ने 270 एकड़ के जवाहर बाग पर कब्जा जमाया था। इसके बाद वे मथुरा के डीएम से बाग को खाली कराने के लिए कहते तो रहे, लेकिन खुद एक्शन नहीं लिया। न ही डीएम मथुरा के खिलाफ कभी शासन को रिपोर्ट दी। अमर उजाला ने 10 जून के अंक में ‘कमिश्नर ने कहा, डीएम ने सुना, किया किसी ने कुछ नहीं’ शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मथुरा गए तो उन्होंने इस प्रकरण की समीक्षा की। अब प्रदीप भटनागर के तबादले का आदेश आ गया। उनकी तैनाती यहां दो जनवरी 2013 को हुई थी। 14 मार्च 2013 को रामवृक्ष ने जवाहर बाग पर कब्जा किया। उसे मथुरा प्रशासन ने दो दिन ठहरने की अनुमति दी थी। इसी की आड़ में उसने 3000 करोड़ की जमीन पर कब्जा जमा लिया। अगर डीएम नहीं सुन रहे थे, तो इतने गंभीर मामले में कमिश्नर खुद सीधे एक्शन ले सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। माना जा रहा कि यही लापरवाही उनके तबादले की वजह रही है। हालांकि आदेश में ऐसा कोई जिक्र नहीं है। बता दें, जवाहर बाग हिंसा के बाद मथुरा के डीएम और एसएसपी को हटा दिया गया था। तभी से माना जा रहा था कि इनसे सीनियर अधिकारियों के भी ट्रांसफर होंगे। इसी के चलते कमिश्नर प्रदीप भटनागर के तबादले को इससे जोड़कर देखा जा रहा है। दो जून को जवाहर बाग की हिंसा के बाद जांच भी उनको ही दी गई थी, लेकिन अगले ही दिन जांच अधिकारी अलीगढ़ के तत्कालीन कमिश्नर चंद्रकांत को बना दिया गया था। अब वे ही आगरा के कमिश्नर पद पर तैनात किए गए हैं।