कासगंज। निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग 530 बी के लिए प्रशासन के द्वारा भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। भूमि अधिग्रहण के संबंध में एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) अधिग्रहण का गजट भी प्रकाशित करा चुकी है। मुआवजा निर्धारित करने की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि इसे लेकर भू-स्वामियों में आक्रोश है। बृहस्पतिवार को उनका गुस्सा खुलकर सामने आ गया। उन्होंने प्रशासन की अधिग्रहण प्रक्रिया को दोषपूर्ण बताते हुए कलेक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन किया। काली पट्टी बांधकर दोषपूर्ण भूमि अधिग्रहण के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपां। भू-स्वामियों का कहना है कि आवासीय और व्यावसायिक भूमि को भी गलत तरीके से कृषि भूमि दर्शा दिया गया है। जिससे उन्हें मुआवजा कम देना पड़े। भू-स्वामियों का कहना है कि जमीन की कीमत करोड़ों रुपये में है, लेकिन कृषि भूमि दर्शाकर मुआवजा काफी कम दिया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग 530 बी के लिए जिले के 32 गांव की 140 हेक्टेयर भूमि अधिगृहित की गई है। 29 गांवों में अधिग्रहण को लेकर लोगों ने आपत्तियां दर्ज करवाई हैं। वहीं, शेष तीन गांव में लोगों की आपत्तियां नहीं आईं। कासगंज शहर, सोरोंजी एवं सड़क पर स्थित ग्रामीण इलाकों की भूमि के प्रकार को लेकर सर्वाधिक आपत्तियां हैं। इनकी संख्या 200 से अधिक हैं। जहां आबादी घोषित भूमि एवं निर्मित भवन भूमि को अधिसूचना में कृषि भूमि दर्शाया गया है। इस संबंध में प्रशासन के द्वारा आपत्तियां मांगी गईं।
भू-स्वामियों ने अपनी आपत्तियां भी दर्ज करा दीं, लेकिन राजस्व प्रशासन द्वारा इनका सही तरीके से निस्तारण नहीं किया गया और न ही भूमि के प्रकार में बदलाव कर दिया। इसे लेकर भू -स्वामियों में आक्रोश है। उन्होंने बृहस्पतिवार को अपना आक्रोश कलेक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन कर व्यक्त किया। काली पट्टी बांधकर पहुंचे भू-स्वामियों ने नारेबाजी भी की। उन्होंने जिलाधिकारी सुधा वर्मा को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उनका कहना था कि उनकी आपत्तियों को भी संतोषजनक तरीके से नहीं सुना जा रहा। उन्होंने बताया कि ग्राम ज्याउद्दीनपुर पर आवासीय, वाणिज्यिक भवन, भूखंडों को अधिग्रहण की अधिसूचना में कृषि भूमि दर्शा दिया गया है। जिलाधिकारी ने भूस्वामियों का ज्ञापन लेकर उन्हें जांच कराने का भरोसा दिया है। भूस्वामियों ने चेतावनी दी कि समस्याओं का निस्तारण न होने पर धरना प्रदर्शन व आत्मदाह को विवश होंगे।