आगरा। बैंकों में सरकारी भागीदारी 50 फीसदी से कम करने की सिफारिश देने वाली पीजे नायक कमेटी की रिपोर्ट पर बैंककर्मी दो फाड़ हो गए हैं। पांच संगठनों ने हड़ताल का ऐलान किया है, जबकि यूनाईटेड फोरम आफ बैंक यूनियन और यूपी बैंक वर्कर्स आर्गनाइजेशन ने हड़ताल के औचित्य पर सवाल उठाते हुए इससे दूर रहने की घोषणा की है। यूपी बैंक वर्कर्स आर्गनाइजेशन के अध्यक्ष डीसी मिश्रा ने कहा कि यूनाइटेड फोरम बैंकों के निजीकरण और सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों में सरकारी पूंजी घटाने के किसी भी प्रस्ताव का विरोध करता रहा है। 23 मई को प्रस्तावित हड़ताल का आह्वान वामपंथियों द्वारा वर्तमान चुनाव में मिली हार से राजनीतिक हताशा मिटाने के लिए किया जा रहा है। नेशनल आर्गनाइजेशन आफ बैंक वर्कर्स ने स्पष्ट किया कि देश में सरकार प्रभावी रूप से काम करना शुरू कर देगी, तब वह प्रजातांत्रिक तरीके से बात करेंगे। उनका संगठन 23 मई को एआईबीए, एआईबीओए, बेफी, इनबेफ और इनबोक द्वारा की जाने वाली हड़ताल में साथ नहीं होगा और उसका पूरी तरह से विरोध करता है।