कासगंज। कोरोना के समय अपनी जान को जोखिम में डालकर काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की सेवाएं समाप्त होेने जा रही है। सरकार से इन कर्मियों को सेवा विस्तार नहीं दिया गया है। जिले में 90 स्वास्थ्य कर्मी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनके हटने के बाद जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ेगा।कोरोना की पहली लहर में स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गई। इसके बाद सरकार ने एनएनएम लैब टेक्नीशियन, ओटी टेक्नीशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर, वार्ड ब्वाय, स्वीपर, डाटा एंट्री आपरेटर, आक्सीजन प्लांट टेक्नीशियन आदि पदों पर कर्मियों को नियुक्त किया। जिले में 90 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई। इनमें से 22 कर्मी जिला अस्पताल में तथा 68 कर्मी सीएमओ कार्यालय व अस्पतालों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। संक्रमितों की जांच से लेकर दवाई आदि देने का काम इन्हीं के जिम्मे था। कोरोना समाप्त हो जाने के बाद ये कर्मी स्वास्थ्य विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे थे, लेकिन शासन ने इनकी सेवा का विस्तार नहीं किया है। 31 जुलाई तक ही ये कर्मी अपनी सेवाएं दे सकेंगे। इसके बाद इनकी सेवाएं समाप्त हो जाएंगी। जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास कर्मियों की काफी कमी चल रही है। इन कर्मियों के माध्यम से विभाग काम ले रहा था। इनके हटने का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजीव सक्सेना ने बताया कि 31 जुलाई तक ये कर्मी कार्य करेंगे। इनके हटने से जिला अस्पताल की सेवाओं पर असर पडेगा। अस्पताल में कर्मियों की काफी कमी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल के लिए ही स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति की गई थी। शासन स्तर से जो दिशा-निर्देश मिलेगा उसके अनुसार कार्य किया जाएगा।