मैनपुरी। मतदाता जागरुकता के लिए प्रशासन द्वारा अभियान चलाए जाते हैं। इसके बाद भी लोगों में मतदान के प्रति जागरुकता नहीं आ पा रही है। एक ओर जहां मतदान का प्रतिशत कम रहता है तो वहीं जरा सी चूक मताधिकार ही बर्बाद कर देती है। निकाय चुनाव में भी इस बार ऐसा ही हुआ। दस निकायों में कुल आठ हजार से अधिक मत जरा सी चूक से निरस्त हो गए। बैलेट पेपर से जब भी कोई चुनाव होता है तो उसमें बड़ी संख्या में वोट बर्बाद हो जाते हैं। जानकारी के अभाव में नियमों का पालन न करने के कारण ऐसा होता है। कई बार तो इन निरस्त हुए वोटों के कारण ही चुनाव का परिणाम ही बदल जाता है। हाल ही में हुए निकाय चुनाव में हजारों मतदाताओं का वोट बर्बाद हो गया। जिले के दस नगर निकायों में कुल 8013 मतदाताओं का वोट बेकार चला गया। अलग-अलग कारणों से ये वोट निरस्त हो गए। ऐसे में इन लोगों को मताधिकार का प्रयोग तो किया, लेकिन उनके वोट का कोई मतलब नहीं रहा।
नगर पालिका क्षेत्र में अध्यक्ष पद के लिए सर्वाधिक मत निरस्त किए गए। इसमें कुल 3579 मत निरस्त हुए। कुल डाले गए मत के सापेक्ष निरस्त मतों का प्रतिशत 4.82 प्रतिशत है।
मतदान प्रतिशत के सापेक्ष सर्वाधिक निरस्त मत नगर पंचायत भोगांव में हुए हैं। यहां 882 मत निरस्त हुए। निरस्त मत का प्रतिशत कुल मतदान के सापेक्ष 5.16 प्रतिशत है। अगर ये मत सही होते तो शायद कई जगह निकाय चुनाव का परिणाम भी बदल सकता था। ऐसे में बैलेट से चुनाव के लिए मतदाताओं को जागरूक करना और भी जरूरी है।
इन कारणों से निरस्त हुए वोट
दरअसल वोट निरस्त होने के कारण बहुत ही आम है। जागरुकता के बाद भी छोटी-छोटी गलतियां मत को बर्बाद कर देती हैं। इसमें सही खाने में मुहर न लगाना, अंगूठे का निशान लगाना, कलम से नाम लिखना। एक से अधिक खाने में मुहर लगा देना आदि वे कारण हैं, जिनके कारण मतपत्र निरस्त किए गए हैं।
निकायवार निरस्त हुए वोट और उनका प्रतिशत
-मैनपुरी-3579-4.82 प्रतिशत
-घिरोर-367-4.72 प्रतिशत
-कुरावली-767-5.15 प्रतिशत
-करहल-603-4.0 प्रतिशत
-ज्योंती खुड़िया-186-5.13 प्रतिशत
-कुसमरा-363-4.84 प्रतिशत
-बेवर-506-4.37 प्रतिशत
-भोगांव-882-5.16 प्रतिशत
-किशनी-368-4.57 प्रतिशत
-बरनाहल-392-4.23 प्रतिशत
-कुल-8013-4.74 प्रतिशत