मथुरा। हर तरफ कृष्ण नाम का जाप। जहां देखो वहीं राधे-राधे। कान्हा के भजनों से गूंज रहा था मथुरा। पंचकोसीय परिक्रमा लगाने के लिए करीब नौ लाख लोग मथुरा पहुंचे। भोर से शुरू परिक्रमा देर रात तक चली। देश के अलग-अलग हिस्सों से तो लोग पहुंचे ही थे विदेशों से भी भक्त आए। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भगवान के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। अक्षय नवमी पर मथुरा की पंचकोसीय परिक्रमा लगाने का विशेष संयोग रहता है। कहा जाता है कि इस यात्रा में भगवान से जो भी मांगों वह मिलता है। इस परिक्रमा को लगाने के लिए शनिवार को ही भक्तों की भीड़ मथुरा पहुंच गई थी। भोर से परिक्रमा शुरू हुई। पंचकोसीय परिक्रमा मार्ग में महाविद्या देवी मंदिर, चामुंडा देवी मंदिर, चर्चिका देवी मंदिर, गोकरणनाथ महादेव मंदिर, रंगेश्वर महादेव, भूतेश्वर महादेव, पिपलेश्वर महादेव, कंकाली देवी मंदिर, विश्राम घाट, बंगाली घाट, ध्रुव घाट, प्रयाग घाट, शृंगार घाट, श्याम घाट, राम घाट, दाऊजी घाट, ऋषि घाट, राजा बली का मंदिर, ध्रुव टीला, सप्तऋषि मंदिर, कंस किला, तुलसी दास जी का मंदिर, नीलकंठ महादेव, बराहा घाट, मणिकर्णिका घाट, सरस्वती कुंड, वासुदेव घाट, गुरुनानक नगर, क्वालिटी तिराहा और डैंपियर नगर से होकर निकली। परिक्रमा मार्ग में इतनी भीड़ थी कि दूर-दूर तक भक्तों का सैलाब नजर आ रहा था। हर तरफ भगवान कृष्ण के भजन गूंज रहे थे। पांच कोस की इस परिक्रमा में लोग भक्ति में डूबे रहे। तमाम लोग तो नाचते हुए चल रहे थे। कुछ लोगों ने हाथ में गन्ना थाम रखा था। भोर से शुरू हुई परिक्रमा देर रात तक चलती रही। विदेशों से भी बड़ी संख्या में आए भक्त।